फ्रेंडली क्लासरूम में आसान पढ़ाई

शिमला—प्री नर्सरी में पढ़ने वाले छात्रों को फ्रैंडली क्लासरूम में पढ़ाना होगा। बता दें कि स्कूलों में प्री नर्सरी के छात्रों को फै्रंडली क्लासरूम बने हैं या नहीं, इस पर अब शिक्षा विभाग की टीम चैकिंग करेगी। शिक्षा विभाग ने शिमला सहित सभी जिलों को यह आदेश जारी कर दिए हैं कि जल्द प्री नर्सरी के छात्रों को पढ़ने के लिए रोचक माहौल बनाया जाए। ऐसा न करने वाले स्कूलों से शिक्षा विभाग जवाबदेही लेगा। दरअसल शिमला में लगभग 300 से 400 प्राइमरी स्कूलों में प्री नर्सरी कक्षाएं शुरू की गई हैं। शिक्षा विभाग ने इन सभी स्कूलों को फ्रेंडली क्लासरूम बनाने के लिए बजट भी स्वीकृत किया था। वहीं, जिन स्कूलों को बजट नहीं मिला है, उन्हें बजट के लिए आवेदन करने को कहा गया था। ऐसे में जिन स्कूलों ने बजट के लिए शिक्षा विभाग को अप्लाई नहीं किया होगा, तो ऐसे में उन स्कूल प्रबंधन की देरी पर उन पर कार्रवाई की गाज भी गिराई जा सकती है। बता दें कि भारत सरकार ने फैसला लिया था कि सरकारी स्कूल में शुरू हुई प्री नर्सरी के छात्रों को फ्रैंडली क्लासरूम में पढ़ाया जाएगा। चार साल की उम्र में सरकारी स्कूल में इस बार दाखिल किए गए नन्हें-मुन्ने बच्चों को कार्टून और खेल-खेल में पढ़ाने के लिए व्यवस्था करने के लिए भी भारत सरकार ने अलग से बजट का प्रावधान किया था। भारत सरकार के निर्देशों के बाद अब फ्रैंडली क्लासरूम छात्रों के लिए सरकारी स्कूलों में बनाना जरूरी है। इस बारे में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिलों को आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं, यह भी कहा है कि जिन स्कूलों में प्री नर्सरी कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, वहां फ्रैंडली क्लासरूम बन जाने चाहिएं। बता दें कि फ्रैंडली क्लासरूम के लिए बजट भी भारत सरकार की ओर से ही आएगा। भारत सरकार ने फ्रैंडली क्लासरूम बनाने के पीछे तर्क दिया है कि चार साल के मासूम स्कूल के माहौल में ढल नहीं पाते। इसी वजह से एक साल तक उन्हें शिक्षकों द्वारा फ्रैंडली महौल में रखा जाएगा। छात्रों को खेल-खेल में गिनती, अ, आ, इ, ई व एबीसीडी पढ़ाई  जाए। एमएचआरडी ने नए वर्ष तक प्री नर्सरी के छात्रों के लिए यह सुविधा देने के निर्देश दिए हैं। यही वजह है कि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने इस बारे में जिला उपनिदेशकों को अवगत करवा कर फ्रैंडली क्लासरूम बनाने का कार्य पूरा करने को कहा है। दरअसल शिमला जिला में सैकड़ांे स्कूलों में प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू की गई हैं, लेकिन प्री नर्सरी के अधिकतर स्कूलों में बजट होने के बाद भी छोटे-छोटे बच्चांे को सुविधाएं नहीं हैं। यही वजह है कि प्री नर्सरी के दूसरे चरण में स्कूलों में छात्रों के दाखिला का रेशो काफी कम हुआ है। इसी रेशों को बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने जिला के स्कूल प्रबंधन को गंभीर होने के आदेश दिए हैं। वहीं, इस बारे में रिपोर्ट भी मांगी गई है कि स्कूलों ने इस बारे में अभी तक क्या कार्य किए गए हैं। जानकारी के अनुसार जिला के स्कूलों में अभी तक प्री नर्सरी में लगभग दो हजार छात्रों के ही दाखिले हो पाए हैं। मार्च में दाखिले का इतना कम रेशो देखते हुए ही जिला उपनिदेशक को शिक्षा विभाग ने कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

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