बिजासन माता मंदिर

इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के समीप टेकरी पर देवी के नौ स्वरूपों में विराजित प्राचीन बिजासन माता मंदिर काफी प्रसिद्ध है। यहां नवरात्र में तो भक्तों की भीड़ रहती ही है, लेकिन आम दिनों में भी यहां माता के दर्शन हेतु भक्तों का आवागन लगा रहता है। पहाड़ी पर विराजित बिजासन माता के दर्शन मात्र से ही कई प्रकार के रोग और कष्ट दूर होते हैं। पहाड़ी पर विराजित होने से बिजासन माता को टेकरीवाली माता के नाम से भी जाना जाता है। टेकरी से इंदौर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जो मन को बहुत सुकून देता है। हजारों वर्ष पुराने बिजासन माता के मंदिर का निर्माण महाराजा शिवाजीराव होलकर ने करवाया था।  बिजासन माता मंदिर में विराजमान नौ दैवीय प्रतिमाओं को तंत्र मंत्र का चामत्कारिक स्थान व सिद्धपीठ माना गया है। नवरात्र में बिजासन माता के दर्शन करने की काफी मान्यताएं है। मंदिर में नवरात्र में अनेक आयोजन होते है। साथ ही इंदौर नगर से चुनरी यात्रा निकालकर माता को चुनरी भी ओढ़ाई जाती है। मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि एक जमाने में बिजासन टेकरी पर काले हिरणों का जंगल था। तंत्र-मंत्र और सिद्धि के लिए उन दिनों मंदिर ने अपनी पहचान बनाई थी। चबूतरे पर विराजित बिजासन माता से महाराजा ने रण जीतने के लिए मन्नत मांगी थी। महाराजा शिवाजीराव होलकर ने मन्नत पूरी होने पर सन् 1760 में मंदिर का निर्माण करवाया था। जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे बिजासन माता मंदिर पर अनेक चमत्कार हुए और लोगों की आस्था बढ़ती गई।

मछलियों को दाना खिलाने से होती है मुराद पूरी

बिजासन माता मंदिर पर चैत्र और शारदीय नवरात्रों में मेला लगता है। माता के मंदिर के समीप ही टेकरी पर एक छोटा सा तालाब है। जहां बड़ी संख्या में मछलियां है। तालाब को लेकर यह मान्यता है कि बिजासन माता के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को मछलियों को दाना खिलाने से मां उनकी मनोकामना जरूर पूरी करती है। साथ ही इन मछलियों को दाना खिलाने से पुण्य भी मिलता है। जब भी आप माता के दर्शन करने जाएंगे, तो टेकरी पर मौजूद इस तालाब पर आपको सैकड़ों भक्त मछलियों को दाना खिलाते जरूर नजर आएंगे। बिजासन माता अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती है। एक अनुमान के मुताबिक नवरात्रों में तीन लाख से अधिक भक्त माता के दर्शन करने यहां पहुंचते हंै। बिजासन माता को सौभाग्य और पुत्रदायिनी माना जाता है। इंदौर ही नहीं प्रदेश भर से नव विवाहित जोड़े यहां पहुंचकर माता का दर्शन-पूजन करते है। यहां महिलाएं अपनी सूनी गोद लेकर आती हैं और माता से मन्नत मांगने पर माता उनकी सूनी गोद भरती है। कहते हैं कि मां के दर्शन के बिना नवरात्रों का पर्व अधूरा रहता है। इस दौरान मंदिर की सजावट देखने लायक होती है।

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