बिन गुरु-कोचिंग सेंटर बॉक्सर बेहाल

शिमला -प्रदेश में सुविधाओं के अभाव के चलते हिमाचली मुक्केबाज बाहरी राज्यों का पलायन कर रहे हैं। पांच सालों के दौरान करीब 60 हिमाचली मुक्केबाज बाहरी राज्यों का पलायन कर चुके हैं। प्रदेश में खेल संबंधी आधारभूत ढांचा न होने के चलते हिमाचली मुक्केबाजों को दूसरे राज्यों में प्रशिक्षण ग्रहण कर अपनी खेल शैली निखारनी पड़ रही है। दुर्भाग्य तो यह है कि राज्य से पलायन करने वाले मुक्केबाजों में केवल दो या तीन बॉक्सर ही मौजूदा समय में हिमाचल के लिए खेल रहे हैं, जबकि अन्य मुक्केबाज दूसरे राज्यों के लिए खेल रहे हैं। बॉक्सिंग एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले पांच सालों में 60 हिमाचली बॉक्सर अभ्यास के लिए बाहरी राज्यों का रूख कर चुके हैं। प्रदेश के मुक्केबाज मध्य प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, भोपाल व पंजाब के प्रशिक्षण स्थलों में अपनी खेल शैली को निखार रहे हैं। इतना ही नहीं वे हिमाचल को छोड़कर अन्य राज्यों के लिए  खेल रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार द्वारा महिला मुक्केबाजों के लिए दत्तनगर में स्पोर्ट्स होस्टल का निर्माण किया जा रहा है।  हिमाचल में बॉक्ंिसग खेल के लिए आधारभूत ढांचे की कमी है। राज्य के शिमला, सुंदरनगर औैर रोहडू में ही बॉक्सिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में एसोसिएशन खेल का बीड़ा संभाले हुए हैं। राज्य में प्रशिक्षकों की बात की जाए, तो राज्य के केवल मात्र तीन ही प्रशिक्षक हैं। ऐसे में सरकार पलायन कैसे रोक पाएगी। बॉक्ंिसग एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भंडारी ने राज्य सरकार से मांग उठाई है कि राज्य में बॉक्सिंग अकादमी खोली जाए। प्रदेश में बॉक्सिंग खेल को बढ़ावा देने के लिए कोचिंग सेंटर भी खोले जाएं, ताकि राज्य में नई नर्सरी तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्रशिक्षित नेशनल ऑफिशल हैं, जो मौजूदा समय में इंटरनेशनल स्तर पर खिलाडि़यों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। यदि राज्य में खेल संबंधित आधारभूत ढांचा विकसित किया जाए, तो राज्य में विश्व स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।

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