बिन परमिशन रूसा में बदलाव क्यों

सिस्टम एनुअल करने पर भारत सरकार की प्रदेश व शिक्षा विभाग को फटकार, देना होगा जवाब

 शिमला —हिमाचल प्रदेश के कालेजों में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा ने एक बार फिर संकट पैदा कर दिया है। पांच सालों में रूसा में दो बार किए गए बदलाव के बाद अब एक बार फिर इसमें सरकार को फेरबदल करना होगा। एमएचआरडी ने राज्य सरकार को रूसा को परमिशन के बिना बदलाव करने पर फटकार लगाई है। राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है कि किस आधार पर रूसा को वार्षिक प्रणाली के तहत लागू किया गया है। केंद्र की इस फटकार के बाद अब शिक्षा विभाग की चिंता भी बढ़ गई है। रूसा थ्री शुरू होने से पहले राज्य सरकार व शिक्षा विभाग को भारत सरकार को ऐसा कोई जवाब देना होगा, जिससे वह संतुष्ट हो जाए। बता दें कि अगर भारत सरकार हिमाचल से रूसा पर दिए गए जवाब पर संतुष्ट नहीं होती है, तो आगे का बजट हिमाचल को नहीं मिलेगा। ऐेसे में अब शिक्षा विभाग भी असमंजस की स्थिति में आ गया है। हैरानी है कि प्रदेश सरकार ने रूसा को वार्षिंक के रूप में तबदील करने से पहले केंद्र सरकार से एक बार भी सुझाव नहीं लिया। अब चिंतनीय विषय यह भी है कि अगर इस बार पहली बार वार्षिंक प्रणाली के तहत परीक्षाएं दे रहे छात्रों के रिजल्ट बेहतर नहीं आते हैं, तो तब भी वार्षिंक सिस्टम को प्रदेश सरकार को बदलना होगा। भारत सरकार भी वार्षिंक प्रणाली के तहत छात्रों के रिजल्ट का आकलन करेगी। फिलहाल उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार का फैसला उन पर ही भारी पड़ गया है। बता दें कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद अगर एक बार फिर रूसा नियमों को बदला जाता है, तो इससे जहां हजारों छात्रों को पेरशानी होगी, वहीं एचपीयू के ऊपर भी कार्यों को बोझ बढ़ जाएगा।

रूसा-थ्री के बजट पर संकट

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के  अधिकारियों ने रूसा को वार्षिंक प्रणाली करने पर सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को शिमला में आयोजित रूसा की समीक्षा बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव व रूसा की राष्ट्रीय मिशन निदेशक ईशिता रॉय ने स्पष्ट कहा है कि यदि हिमाचल ने रू सा के तहत एनुअल सिस्टम में बदलाव नहीं किया तो, प्रदेश को रूसा-थ्री के बजट से हाथ धोना पड़ सकता है। उन्होंने बैठक में इस सिस्टम को भारत सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक सेमेस्टर सिस्टम करने के निर्देश दिए हैं।

एसओएस का परिणाम घोषित

धर्मशाला। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने एसओएस की मार्च, 2019 की वार्षिक परीक्षाओं का परिणाम रविवार को देर रात को घोषित कर दिया। जमा दो में कुल 15847 परीक्षार्थी बैठे थे। इसमें केवल 3443 परीक्षार्थी ही पास हुए हैं। 8932 परीक्षार्थियों की री-अपीयर है। इसके अलावा 3410 परीक्षार्थियों का परिणाम फीस और पात्रता दस्तावेज जमा न करवाने के कारण रोक दिया गया है। परीक्षा में 59 परीक्षार्थियों का अंतिम अवसर समाप्त होने के कारण फेल घोषित किया है। बोर्ड अध्यक्ष डा. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन और पुनर्निरीक्षण के लिए इच्छुक अभ्यर्थी अध्ययन केंद्र के माध्यम से 20 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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