बिलासपुर में कूड़ा न देने पर 29 को नोटिस

ईओ उर्वशी वालिया ने की कार्रवाई, मांग न मानने पर 500 से पांच हजार तक लगेगा जुर्माना

बिलासपुर –शहर में डोर-टू-डोर गीला व सूखा कचरा एकत्रित करने को लेकर नप ने बड़े स्तर पर अभियान छेड़ दिया है। योजना के तहत कूड़ा न देने वालों को नप ने 29 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। बुधवार को भी नप ने विभिन्न वार्डों में जाकर लोगों को घरों का कूड़ा अलग-अलग कर देने को कहा है। ईओ उर्वशी वालिया ने बताया कि अब तक नप के फरमानों को न मानने वाले लोगों को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई के बीच रोजाना विभिन्न वार्डों में जाकर नप की टीमें लोगों को इस नई व्यवस्था के बारे जागरूक भी कर रही हैं। ईओ ने बताया कि इस अभियान के तहत लोगों को उनके घरों का कूड़ा नप को अलग-अलग कर देने का आग्रह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी सभी वार्डों में जाकर लोगों को समझाया जा रहा है, लेकिन यदि शहरवासी इस योजना को नहीं अपनाते हैं ता उन्हें जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए पांच सौ से पांच हजार रुपए तक का प्रावधान है। ईओ ने बताया कि रोजाना नप की टीम एक-एक वार्ड को चिन्हित कर उनकी परिक्रमा कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक के अभियान में कुछ वार्डों से लोगों का काफी अच्छा सहयोग मिला है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद के कर्मचारी जल्द अलग-अलग वार्ड के स्कूलों में जाकर स्कूली बच्चों को गीले व सूखे कूड़े के बारे में जागरूक करेंगे। इस दौरान बच्चों को बताया जाएगा कि नगर परिषद गीले कचरे और सूखे कचरे अलग-अलग  एकत्रित करेगी। गीले कूड़े का प्रयोग जैविक खाद बनाने के लिए किया जाएगा। ऐसे में नप ने शहर में स्वच्छता अभियान को कामयाब बनाने के लिए अनूठी पहल शुरू की है, जिसमें महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि बार-बार आग्रह व जागरूक करने के बावजूद डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की कवायद बिलासपुर शहरवासियों के सिरे नहीं चढ़ पा रही है। लोग अभी भी घरों का कूड़ा नप के सफाई कर्मचारियों को देने की बजाय  खुले में फेंक रहे है। गौरतलब है कि इससे पहले डोर-टू-डोर कूड़ा एकत्रित करने को लेकर नगर परिषद ने में नुक्कड़ नाटकों के जरिय भी वार्ड के बाशिदों को जागरूक किया था। उस दौरान लोगों को अपने-अपने घरों से गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग करने बारे भी बताया गया था। इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य लोगों को डोर-टू-डोर अभियान से जोड़ना था। बावजूद इसके लोगों का कुछ ज्यादा सहयोग नहीं मिल पाया है।

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