बीए संस्कृत वालों को न दें शास्त्री डिग्री

अंब, नादौन -हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद ने बीए संस्कृत वालों को शास्त्री डिग्री देने की केंद्रीय विश्वविद्यालय की घोषणा का विरोध किया है। परिषद के प्रदेशाध्यक्ष डा. मनोज शैल, महासचिव अमित शर्मा, कोषाध्यक्ष सोहन लाल, उपाध्यक्ष अमर सेन, जंगछुब नेगी, परमदेव, तेजस्वी शर्मा, कमलेश कुमारी, योगेश अत्री, शांता कुमार, डा. जगदीश, शेर सिंह, गीताराम, ललित शर्मा, नरेंद्र कुमार व सभी जिला प्रधानों में हमीरपुर के सुनील कुमार, कांगड़ा के जीवन चंदेल, ऊना के बलवीर, बिलासपुर के राजेंद्र शर्मा, मंडी के बृजमोहन, कुल्लू के कुलदीप, शिमला के दिग्विजयेंद्र, सोलन के दुर्गानंद, सिरमौर के रामपाल, लाहुल के सतीश कुमार, किन्नौर के  बंगछेन नमज्ञल, चंबा के हेम सिंह ने जारी संयुक्त ब्यान में कहा कि यदि बीए संस्कृत वाले को शास्त्री की डिग्री दी जा सकती है तो बीए में गणित पढ़ने वाले को भी बीएससी की डिग्री दे दी जाए तथा लोक प्रशासन व राजनीति शास्त्र पढ़ने वाले को लॉ की डिग्री दे दी जानी चाहिए। जो पांच वर्ष में अंग्रेजी, राजनीतिक शास्त्र या इतिहास के साथ कम से कम बीस पेपर संस्कृत के ग्रंथों के पढ़ता है, उसे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय तथा अन्य विश्वविद्यालय शास्त्री की डिग्री देते हैं, लेकिन जो मात्र तीन वर्ष में तीन या चार पत्र संस्कृत के पढ़ता है, उसे शास्त्री की डिग्री देने की घोषणा की जा रही है। उन्होंने कहा कि बीए में संस्कृत पढ़ने से यदि शास्त्री डिग्री मिल जाएगी तो संस्कृत कालेजों का महत्त्व ही क्या रह जाएगा और पांचवर्षीय शास्त्री कौन करेगा। परिषद के प्रदेशाध्यक्ष डा. मनोज शैल ने कहा कि शास्त्री व बीए संस्कृत के पाठ्यक्रम को समान कर दें। विश्वविद्यालय को पहले पाठ्यक्रम समान करना चाहिए, फिर इस विषय पर विचार करना चाहिए और जैसा शास्त्री का पाठ्यक्रम हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में है वैसा ही पाठ्यक्रम लागू कर शास्त्री की उपाधि का कोर्स चलाना चाहिए।

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