बोर्ड के पास 418 लाख यूनिट बिजली

शिमला —हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के पास रोजाना 418 लाख यूनिट बिजली उपलब्ध है। हालांकि अभी तक यहां पर उत्पादन चरम पर नहीं आया है और केवल 75 फीसदी उत्पादन ही यहां परियोजनाएं कर पा रही हैं, लेकिन हालात सुधर चुके हैं। राज्य बिजली बोर्ड ने पिछली सर्दियों में दूसरे राज्यों से बैंकिंग प्रणाली से जो 1500 मिलियन यूनिट बिजली ली थी,  उसे वापस कर दिया है। इस बिजली को वापस करने के साथ ही हिमाचल प्रदेश अगली सर्दियों के इंतजाम में जुट गया है। सर्दियों में प्रदेश में बिजली का उत्पादन लगभग ठप हो जाता है और परियोजनाओं में मात्र 15 से 20 फीसदी तक बिजली निर्मित हो पाती है। ऐसे हालातों में दूसरे राज्यों से अपनी दी हुई बिजली को प्रदेश वापस लेता है, वहीं और बिजली भी ली जाती है, जिसे फिर गर्मियों में वापस किया जाता है। ऐसे ही पिछली सर्दियों में ली बिजली वापस कर दी गई है और अब आगे का इंतजाम किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस समय प्रदेश बिजली बोर्ड के पास कुल 418 लाख यूनिट बिजली रोजाना की उपलब्ध है। इसमें से 108 लाख यूनिट बिजली को दिल्ली व उत्तर प्रदेश को फॉरवर्ड बैंकिंग प्रणाली में दिया जा रहा है, जिसे सर्दियों में वापस लिया जाएगा। वहीं अभी तक प्रदेश में बिजली का उत्पादन चरम पर नहीं पहुंचा है। बिजली बोर्ड के अपने प्रोजेक्ट, जो कि 90 लाख यूनिट रोजाना तक का उत्पादन करते हैं। अभी रोजाना 74 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। इसके साथ बसपा परियोजना, जो कि 79 लाख यूनिट बिजली उत्पादित करती है, वह 55 लाख यूनिट कर रही है। रविवार को यह प्रोजेक्ट 40 लाख यूनिट पर पहुंच गया है। मौसम में गर्माहट नहीं होने से ग्लेशियर नहीं पिघल रहे, जिस कारण नदियों में पानी की पर्याप्त मात्रा नहीं है। इस कारण से उत्पादन भी पूरे उफान पर नहीं है। कुछ दिनों तक चोटियों पर तापमान बढ़ने से ही राहत मिल पाएगी।

रोजाना 280 लाख यूनिट की डिमांड

हिमाचल की मौजूदा दिनों में बिजली की डिमांड 280 लाख यूनिट रोजाना की है, जो आसानी से पूरी हो रही है। बोर्ड को सेंट्रल सेक्टर यानी एसजेवीएन व एनएचपीसी जैसे केंद्रीय उपक्रमों से रोजाना 290 लाख यूनिट बिजली मिल रही है। इसके अलावा छोटे ऊर्जा उत्पादक भी 54 लाख यूनिट बिजली रोजाना बिजली पैदा कर रहे हैं।

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