ब्यास से आस… बुझ सकती है ज्वालामुखी की प्यास

ज्वालामुखी—विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्रीज्वालामुखी विश्व के मानचित्र पर अंकित ऐतिहासिक देव स्थल है। जहां शहनशाह अकबर जैसी पराक्रमी राजा का भी मां की पावन व अखंड ज्योतियों ने अभमान तोड़ कर उसे घुटनों के बल दरबार में आने पर विवश कर दिया था। इस ऐतिहासिक देव स्थल में सालाना लाखों श्रद्धालु मां के दरबार में परिवार सहित दर्शनों के लिए आते हंै। यहां के लोगों की रोजी-रोटी मंदिर से ही जुड़ी है यही कारण है कि यहां पर छह माह का सीजन व छह माह का मंदी का दौर होता है। नवरात्र में व स्कूलों में छुट्टियों के मौके पर यहां यात्रियों की भीड़ रहती है। पिछले कई वर्षों से ज्वालामुखी में पानी की किल्लत यात्रियों व स्थानीय लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है। ज्वालामुखी को कुंदलीहार में आईपीएच विभाग के कुओं से पानी आता है। यह योजना बहुत पुरानी है। जिस वजह से पानी की पाइपें पुरानी हो गई हंै और पानी की लीकेज होने की वजह से पानी रास्ते में ही बह जाता है। यहां पर लगाई गई पानी की मोटरें बहुत पुरानी व कंडम हो चुकी हंै जो पानी की सप्लाई करने में जल्दी ही हांफने लगती हंै। ज्वालामुखी में आबादी भी बड़ी है और यहां पर यात्रियों की आमद भी बड़ी है परंतु पानी की योजना वही 25 साल पुरानी है जबकि इतने लंबे अरसे में ज्वालामुखी की आबादी तीन गुना हो गई है और यहां पर यात्रियों की संख्या में भी कई गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। ज्वालामुखी को अब कुंदलीहार के कुएं पानी की आपूर्ति करने में विफल हो गए है। समीपवर्ती खड्डों का पानी सूख गया है। जिस वजह से पानी बहुत कम मात्रा में ज्वालामुखी के टैंकों में इकट्ठा हो पाता है। कभी ज्वालामुखी में पानी की सप्लाई तीन समय होती थी आज दिन में सिर्फ एक समय सुबह पानी की सप्लाई होती है। जिससे लोगों को पीने के पानी तक की मुश्किल हो गयी है। कई बार विभाग के अधिकारियों को समस्या बताई गई परंतु कोई सुनवाई नहीं होती है। विशेषज्ञों की मानें तो ब्यास नदी ही अब ज्वालामुखी की प्यास को बुझा सकती है। जिसके लिए बड़ी योजना बनानी होगी। भड़ोली के पास कटोई से पानी को लिफ्ट करना होगा। ब्यास नदी में 24 घंटे पानी है जिसे उठाकर बाहर से आने वाले यात्रियों की भी मांग को पूरा किया जा सकता है। ज्वालामुखी में पानी की किल्लत दूर हो गई तो यहां पर यात्रियों व पर्यटकों का उमड़ना शुरू हो जाएगा। पानी की कमी के लिए ज्वालामुखी बदनाम हो चुका है इस दाग को धोने के लिए सरकार ब्यास नदी से पानी उठाए और यहां के लोगों के लिए सौगात दे तो यहां के लोगों के दिन फिर जाएंगे। राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला ने संपर्क करने पर कहा कि ज्वालामुखी में पानी की समस्या को लेकर सरकार गंभीर है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उनके आग्रह पर पांच करोड़ रुपए पुरानी हो चुकी पाइपों को बदलने के लिए दिए हंै जो बदली जा रही हंै जिससे लीकेज बंद होगी और पानी टैंकों में जाएगा । यदि उसके बाद भी पानी की कमी रह जाएगी तो ब्यास नदी से भी पानी उठाने की योजना को तैयार कर सरकार से स्वीकृति दिलवाई जाएगी। ताकि यात्रियों व स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

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