भगवान राम ने दिया सत्य, प्रेम-मर्यादा का संदेश

 बरठीं—बरठीं के समीप शुक्रेश्वर महादेव बजरंग बली मंदिर मलारी भल्लू में  ब्रह्मलीन महंत नागा बाबा शक्ति गिरि जी महाराज की स्मति में चल रही श्रीराम कथा के दौरान पंडित सोहन लाल शर्मा ने प्रवचनों की वर्षा की। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने 14 वर्ष वन में रहकर भारत भर में भ्रमण कर भारतीय आदिवासी जनजातीय, पहाड़ी व समुद्री  लोगांे के बीच सत्य, प्रेम, मर्यादा और सेवा का संदेश फैलाया यही कारण है रहा कि राम का जब रावण से युद्ध हुआ तो सभी तरह की अनार्य जातियों ने राम का साथ दिया। यह वह काल था जब लोगों में किसी भी प्रकार की जातिवादी सोच नहीं थी। लोग सिर्फ  दो तरह की सोच में बंटे हुए थे- सुर और असुर जिन्हे देव और दैत्य कहा जाता था। उन्होंने कहा कि वनवास के दौैरान लक्ष्मण ने रावण की बहन सूर्पणखा की नाक काट दी थी। सीता स्वयंर में अपनी हार और सूर्पणखा की नाक काटने का बदला लेने के लिए रावण ने सीता का हरण कर लिया। राम ने सीता को रावण के चुंगल से छुड़ाने के लिए हनुमान, सुग्रीव, विभीषण, नलनील, अंगद सहित अन्य की सहायता लेकर लंका पर चढ़ाई कर दी और पराक्रमी रावण का वध कर दिया। इस सारे घटनाक्रम में हुनमान ने श्रीराम का बहुत साथ दिया। इसलिए हनुमान जी श्रीराम के अन्नय सहायक और भक्त सिद्व हुए। अंत में  राम, सीता व लक्ष्मण सहित पुष्पक विमान से अयोध्या वापस आए थे। इस अवसर पर महन्त महादेव गिरी जी महाराज ने उपस्थित राम भक्तों को आशीर्वाद दिया व बताया कि 24 मई को विशाल यज्ञ व भंडारा  का आयोजन किया जाएगा।

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