भाजपा-कांग्रेस दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

नेरवा—आज से एक दिन बाद यानी गुरुवार को लोकसभा चुनाव के नतीजे निकल जाएंगे। इन नतीजों पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं सहित चौपाल के लोगों की भी विशेष नजर रहेगी। चौपाल विधान सभा क्षेत्र के तीन बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा यहां दांव पर लगी हुई है। सबसे जयादा नजर चौपाल के विधायक बलवीर सिंह वर्मा के रिपोर्ट कार्ड पर रहेगी। वर्मा एक माह से चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए थे व चौपाल विधान सभा क्षेत्र के लगभग सभी क्षेत्रों और पंचायतों का दौरा इस दौरान कर चुके थे। इस दौरान विधायक ने भाजपा प्रत्याशी को भारी बढ़त दिलवाने के लिए लोगों से कई वादे भी किए हैं। बलवीर वर्मा ने नेरवा में मुख्यमंत्री की एक बड़ी जनसभा करवा कर मोदी लहर एवं मुख्यमंत्री की लोकप्रियता का कार्ड खेलते हुए भाजपा के प्रचार को फं्रट फुट पर पंहुचा दिया था। इसका पार्टी को कितना लाभ मिल पाता है यह भी देखने वाली बात होगी। विधायक वर्मा यदि भाजपा प्रत्याशी को लीड दिलवाने में कामयाब भी हो जाते हैं तो लोगों से किये गए वादों को पूरा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा। इन वादों का पूरा होने या न होने पर 2022 के विधान सभा चुनाव में विधायक के लिए नफा-नुक्सान का गणित काफी हद तक निर्भर करेगा। कांग्रेस के बड़े नेता व प्रदेश कांग्रेस महासचिव रजनीश किमटा की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव में दांव पर है। चौपाल कांग्रेस का गढ़ रहा है, पार्टी ने उन्हें स्टार प्रचारक भी बनाया था। उन्हों ने अपने गृह क्षेत्र ननहार व कुपवी के इलाके में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के साथ पार्टी प्रत्याशी के लिए जनसभाएं कर प्रचार भी किया था। इसके अलावा उनकी धर्मपत्नी अनीता किमटा चौपाल के बमटा वार्ड से वर्तमान में जिला परिषद् सदस्य भी हैं। इस लिहाज से बमटा जिला परिषद् वार्ड ही नहीं पूरे विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस को बढ़त दिलवाना भी उनकी प्रतिष्ठा के साथ जुड़ा हुआ है। कांग्रेस की तरफ  से भी चौपाल में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, आनंद शर्मा, रजनी पाटिल आदि बड़े नेताओं की एक बड़ी जनसभा करवा कर कांग्रेस के पक्ष में हवा बनाने का प्रयास किया गया। कांग्रेस के इस प्रयास का पार्टी को कितना लाभ मिल पाया है यह तो गुरूवार को नतीजे आने के बाद ही पता चल पायेगा। इसी प्रकार 2003 से 2012 तक चौपाल विधान सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व विधायक व कृषि एवं बागबानी विपणन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डा. सुभाष चंद मंगलेट की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से जुड़ी हुई है। हालांकि पार्टी हाई कमान ने चुनाव से पहले उनकी ड्यूटी पहले गुजरात एवं बाद में मध्य प्रदेश में बतौर पर्यवेक्षक लगा दी थी। इस वजह से पार्टी के लिए क्षेत्र में प्रचार न कर पाने की वजह से उनके पास पूरे विधान सभा क्षेत्र में पार्टी को बढ़त दिलाने की जिम्मेदारी से बचने का बहाना तो हो सकता है परंतु उनके अपने गृह क्षेत्र न्योल की पांच पंचायतों में पुराने जनाधार को बनाए रखना उनके लिए एक  चुनौती रहेगा। बहरहाल गुरुवार को आने वाले लोक सभा चुनाव के नतीजों और इन तीनों दिग्गजों के रिपोर्ट कार्ड पर हाई कमान सहित दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं एवं आम लोगों की भी पैनी नजर रहेगी।  

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