भाजपा के बड़े नेता

हिमाचल में भाजपा का चुनाव प्रचार अंत में ‘बड़े नेता’ की तलाश तक यूं नहीं पहुंचा, बल्कि इसके साथ समर्थन व सामर्थ्य का लेखाजोखा भी नत्थी है। चुनावी जनसभाओं के निष्कर्ष वास्तव में पार्टियों के आत्मबल की परीक्षा के उन्मादी रुख भी हो सकते हैं, इसलिए इस उल्लास की पताका को समझना होगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का एक दिन में चंबा, बिलासपुर व नाहन दौरा कई नेताओं की टोपियां-शेखियां देख गया, फिर भी ऊंचे बोल आकर अगर अनुराग ठाकुर के साथ खड़े होते हैं, तो यह गणना महत्त्व रखती है। हालांकि राजनीति में सांसद अनुराग का कद पहले ही इस स्थिति में देखा गया कि निवर्तमान सरकार में कोई ओहदा इन्हें मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो कुछ प्रश्न खड़े होते रहे। यह केवल एक सांसद के पक्ष में कहे गए शब्द भी नहीं, बल्कि हिमाचल के भीतर एक खास सियासत का मूल्यांकन है। सांसद अनुराग ठाकुर की परिधि में पार्टी को मिला राजनीतिक स्थायित्व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की हस्ती का विस्तारित पक्ष है। हालांकि विधानसभा चुनाव ने हमीरपुर की राजनीतिक हानि से जो समीकरण पैदा किए, उनकी उथल-पुथल पार्टी के भीतर अभी खत्म नहीं हुई है, फिर भी शाह की रैली अपना लंगर डाल गई है। शाह का बयान भविष्य की नई गिनती हो सकता है या अब इस हकीकत को स्वीकार करने का वक्त आ गया है कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का सियासी पक्ष केंद्र में अपना हिस्सा प्राप्त करेगा। अनुराग के चेहरे के पीछे पहले केवल ‘धूमल छवि’ का अलंकृत पक्ष देखा जाता रहा है, जबकि बतौर सांसद एक अलग पृष्ठभूमि अब दिखाई दे रही है। इस पर भी गौर करना होगा कि भाजपा में बड़े नेता के मायने कैसे बदल रहे हैं और इस शृंखला में भविष्य की वकालत है क्या। हिमाचल से जो अब तक भाजपा के बड़े नेता रहे हैं, वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शांता कुमार और धूमल की विरासत में नए नेताओं का आरोहण अब संतुलन की कहानी है, तो सत्ता के समीकरण में प्रतिबिंबित भाजपा की पसंद का नया परिदृश्य भी जयराम सरकार के वर्तमान स्वरूप में देखा जा रहा है। पुनः केंद्र में सरकार के लिए प्रतीक्षारत भाजपा के लिए नई टीम की टोह सरीखा वक्तव्य देकर अमित शाह ने भले ही संसदीय परिप्रेक्ष्य में हिमाचल से अनुराग को आगे कर दिया, लेकिन चुनावी परीक्षा में उद्घोष अभी अधूरा है। पिछले दौर के नगीना रहे जगत प्रकाश नड्डा की भूमिका में हिमाचल का उत्थान भी परीक्षा दे रहा है, तो उनके हवाले से प्रदेश में चुनाव को कितनी आशाएं मिलीं, इसका भी फैसला होगा। शाह अगर ‘बड़े नेता’ की संज्ञा में अनुराग ठाकुर का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं, तो क्या नड्डा की आगामी पारी अब विश्राम की हालत तक पहुंच गई है। बेशक हिमाचल के बीच एक धुरी पूरे चुनाव को अलग करके भाजपा के कानों में अपनी ध्वनियां परोस रही है या वर्तमान के बीच नए संतुलन की पेशकश में शाह ने शंकाओं को शांत कर दिया। चुनाव के बीचोंबीच ‘बड़े नेता’ का चयन करके भाजपा ने अपने भीतर कुछ तो देखा होगा। यह सामान्य या साधारण संबोधन कतई नहीं, खासतौर पर जब हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से बड़े नेताओं की कमी नहीं। केंद्र में मंत्री के पद तक पहुंचे जगत प्रकाश नड्डा और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती की पैरवी में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र को बड़े नेता की जरूरत अनुराग ठाकुर से पूरी हो रही है, तो यह पार्टी का नया मंगलगीत है।

 

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