मंगोलिया के विद्वान से सीखा बौद्ध धर्म का ज्ञान

मकलोडगंज में धर्मगुरु दलाईलामा ने विदेशियों को बताया बौद्ध धर्म का महत्त्व, पहले दिन खूब उमड़े अनुयायी

मकलोडगंज -धर्मगुरु दलाईलामा ने उतरातंत्र पर आधारित टीचिंग के दौरान कहा कि तिब्बत में बौद्व धर्म का प्रचलन छठी व सातवीं सदी में हुआ है। सामान्य स्थिति से हम अगर अभ्यास करें, तो उतरातंत्र ग्रंथ की वास्तविकता को हम भली-भंाति समझ सकतें हैं। परमपावन दलाईलामा तेजिंन ग्यात्सों ने बौद्व मठ में मौजूद तुर्की, मंगोलिया तिब्बती एवं भारतीय मूल के लोगों को शुक्रवार को बौद्ध धर्म के विभिंन्न ग्रंथों व सूत्रों के बारे मंे विस्तार से प्रवचन दिए हैं। धर्मगुरु ने कहा कि बौद्ध धर्म के निर्वाण को प्राप्त करने वाले सभी सूत्रों का मैंने अध्ययन किया हैं। मंगोलिया में बौद्ध धर्म के बहुत बड़े महान विद्वान हुए, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है। तुर्की से मकलोडगंज में धर्मगुरु की टीचिंग में भाग लेने आए बौद्ध भक्तों को धर्मगुरु दलाईलामा ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य के लिहाज से आठ घंटे सफर करके मेरा आपके स्थान पर जाकर बौद्ध धर्म पर प्रवचन देना मुमकिन नहीं था। इसलिए मैंने आपकी सहूलियत के लिहाज से यही चूगंला खागं मठ में टीचिंग का आयोजन किया हैं। उन्होंने कहा कि तिब्बत व भारत उत्तर में स्थित होने से यहां पर बौद्ध धर्म का प्रसार तेजी से हुआ है। वहीं , मकलोडगंज में बौद्ध धर्म पर आधारित टीचिंग के पहले दिन हजारों बौद्ध अनुयायियों ने धर्मगुरु दलाईलामा की अलौकिक छवि को निहारते हुए उनके प्रवचनों को एकाग्रता के साथ सुना हैं।

 

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