मंडी में कांग्रेस को अस्तित्व बचाने की चुनौती

पिछले लोकसभा चुनावों में प्रतिभा सिंह को 39 हजार से हराकर जीते थे भाजपा सांसद रामस्वरूप

मंडी – पिछले लोकसभा चुनावों में आश्चर्यचकित परिणाम देने वाली हॉट सीट मंडी पर इस बार भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। पिछले चुनावों में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने उस समय के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी को हराकर राजनीति में भूचाल ला दिया था। इस बार मंडी सीट से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का नाम जुड़ने और पंडित सुखराम जैसे बडे़ नेता की चुनौती ने हॉट सीट को और भी हॉट बना दिया है। मतदान के लिए अब तीन दिन ही शेष बचे हैं और प्रत्याशियों ने भी अब चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झौंक दी है। मंडी सीट पर इस बार भी विभिन्न दलों के साथ ही आजाद प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला वाली हॉट सीट मंडी से भाजपा इस बार बड़ी जीत की उम्मीद लगाए बैठी है, तो कांग्रेस को अपना अस्तित्व बचाने के लिए एक जीत की जरूरत है। भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा के सिर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चुनाव मैदान में खुद सारथी होने के कारण भाजपा अपनी जीत पिछले चुनाव के मुकाबले दोगुने अंतर से करने के दावे कर रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा ने उस समय के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी व सांसद प्रतिभा सिंह को 39856 मतों से हराया था। उस समय जहां नरेंद्र मोदी की प्रबल लहर थी, वहीं अब मोदी फेक्टर के साथ ही मंडी से मुख्यमंत्री होने का फायदा भी भाजपा इस चुनाव में ले रही है। बीते पांच वर्षों में रामस्वरूप शर्मा भी लोगों की उम्मीदों पर लगभग खरे उतरे हैं। लोगों के बीच रहने के साथ ही संसदीय क्षेत्र को विकास के भी कई प्रोजेक्ट मिले हैं। इस सबके बाद मंडी से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का होना भाजपा की बड़ी जीत के दावों का कारण है। पिछले चुनावों में भाजपा ने 17 हलकों में से 12 हलकों में बढ़त ली थी। इस बढ़त का लाभ बाद में विस चुनावों में भी भाजपा को मिला था और पार्टी संसदीय क्षेत्र के 17 हलकों में से 13 सीटें भाजपा के कब्जे में हैं। मंडी जिला में तो कांग्रेस खाता भी नहीं खोल सकी थी। विस चुनावों में हार के बाद अब कांग्रेस व पंडित सुखराम अपने अस्तित्व बचाने के लिए जीत की लड़ाई लड़ रहे हैं।

आश्रय के लिए सुखराम का बड़ा दांव

अपने बेटे अनिल शर्मा के कांग्रेस सरकार में मंत्री व विधायक होने के बाद भी पंडित सुखराम ने कांग्रेस में शामिल होकर बड़ा दांव खेला है, जिसके चलते अनिल शर्मा को मंत्री पद से हाथ भी धोना पड़ा है। अब आश्रय की जीत-हार सुखराम परिवार के राजनीतिक भविष्य को भी तय करेगी।

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