मनकोटिया खामोश और सुशांत भी शांत

धर्मशाला    —लोकसभा चुनावों में इस बार कांगड़ा के दो पुराने दिग्गजों की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों में आक्रामक नेताओं के रूप में अपनी अलग पहचान रखने वाले नेता पिछले विधानसभा चुनावों तक सक्रिय भूमिका में थे। हालांकि डा. राजन सुशांत की टीम तो इस बर नमो अगेन के बैनर तले काम कर रही है, लेकिन पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया फिलहाल चुप हैं। ऐसे में उनके समर्थक असमंजस में हैं। इन नेताओं के वोट बैंक पर भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दल अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं, ताकि संबंधित क्षेत्रों में मत प्रतिशतता में बढ़ोतरी की जा सके। हालांकि उनके कुछ समर्थकों ने अलग राह पकड़ कर कांग्रेस व भाजपा में अपना वजूद तलाशना शुरू कर दिया है, लेकिन बहुत से लोग अभी भी उनके इशारे का इंतजार रहे हैं। गौर हो कि कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया और पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद डा. राजन सुशांत का भी अपना जनाधार है, लेकिन ऐसा पहली बार देखा जा रहा है कि नेता जी फिलहाल शांत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि चुनाव प्रचार अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। दोनोें ही नेताओं ने पिछले विधानसभा चुनाव लड़े थे। पार्टी टिकट न मिलने के चलते ये आजाद मैदान में थे, जिसके चलते वे चुनाव जीत तो  नहीं सके, लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्रों में उनकी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी भी नहीं जीत पाए। इसके बाद लोकसभा चुनावों में कांग्रेस व भाजपा ने बागियों व रूठों को मनाने के लिए अभियान चलाए और बहुत से नेताओं को पार्टी में वापस भी लिया। इतना ही  नहीं, भाजपा ने कांग्रेस और कांग्रेस ने भाजपा के कई नेताओं को भी अपने-अपने पाले में खड़ा कर अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है, लेकिन न तो चुनाव प्रचार के अंतिम दौर तक मेजर मनकोटिया कांग्रेस में दिख रहे हैं और न ही डा. सुशांत की वापसी हो पाई है। हालांकि डा. सुशांत व उनकी टीम नमो अगेन के नाम से काम  कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी चुप्पी से असमंजस का माहौल है, जबकि मनकोटिया की अंतिम दौर तक चुप्पी कार्यकर्ताओं के लिए असमंजस का सबब बनी हुई है। उधर, पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का कहना है कि उनके समथकों के हर दिन फोन आ रहे हैं। ऐसे में वह जल्द ही उनसे मिलकर सारे हालात पर चर्चा करने वाले हैं। दूसरी तरफ सुशांत अभी खामोश हैं।

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