महासु रियासत पर भाजपा का कब्जा

शिमला—महासु रियासत के नाम से विख्यात रहे शिमला संसदीय क्षेत्र पर भाजपा का पक्का कब्जा हो चुका है। इस रियासत ने तीन मुख्यमंत्री दिए जिसमें सबसे पहले डा.यशवंत सिंर परमार थे और बाद में ठाकुर राम लाल और वीरभद्र सिंह हुए।  परमार के बाद इस रियासत पर शिमला जिला का कब्जा रहा जहां से 6 दफा लगातार कांग्रेस का सांसद रहा। मगर पुराने मिथक को अब भाजपा ने तोड़ दिया है और कांग्रेस का गढ़ खत्म कर दिया है। शिमला संसदीय क्षेत्र मंे अब कब्जा सिरमौर का है। सिरमौर वाकई सिरमौर बनकर उभरा है। तीन दफा लगातार भाजपा ने कांग्रेस के इस दुर्ग को ढहा दिया जिसके बाद अब कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अब यह नहीं कहा जा सकता कि शिमला जिला कांग्रेस का गढ़ है क्योंकि यह पहचान अब गुजरे जमाने की बात हो चली है। शिमला जिला से भाजपा को भारी भरकम लीड मिली जो सोलन और सिरमौर में भी कायम रही है। यहां से कांगेस के धनी राम शांडिल दूसरी दफा  चुनाव हारे हैं और एक चुनाव मोहन लाल ब्राक्टा हार चुके हैं। भाजपा के वीरेन्द्र कश्यप दो चुनाव लगातार जीते जिसके बाद अब सुरेश कश्यप ने बड़ी लीड लेकर जीत दर्ज की है। लगातार तीन बार कांग्रेस की हार होने से साफ हो गया है कि कांग्रेस का गढ़ टूट चुका है और इसे दोबारा से हासिल करना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी।  महासू रियासत में लगातार आ रही दरार को देखते हुए ही कांग्रेस ने यहां से अपना प्रदेशाध्यक्ष खड़ा किया लेकिन इससे भी चुनाव नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा। ऐसे मंे अब कांगे्रस भविष्य में क्या करेगी  यह एक बड़़ा सवाल खड़़ा हो गया है। सवाल भी ऐसा कि कांग्रेस के किसी नेता के पास इसका कोई जवाब नहीं है। भाजपा ने पूरी सूझबूझ और मैनेज्ड तरीके से इस किले को फतह किया है। विधानसभा चुनाव मंे भी भाजपा ने शिमला शहरी सीट को जहां कायम रखा वहीं चौपाल तथा जुब्बल कोटखाई को अपने साथ मिला लिया। यह तीन बड़़े क्षेत्र हैं जहां पर भाजपा ने अपना कब्जा जमाया जिसका लाभ इस लोकसभा में भी उसे मिला है। इसके साथ सरकार में शिमला जिला को अधिमान देने से भी भाजपा को बेहतर नतीजे मिले हैं जहां से शिक्षा मंत्री और मुख्य सचेतक के पद पार्टी ने दिए हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस इस रियासत में चारों खाने चित्त हो गई है। उसकी हर तरह की रणनीति बेहतर साबित हो रही है।

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