मांझी खड्ड में प्रवासी फैला रहे गंदगी

गगल—एक ओर जयराम सरकार आर्गेनिक और जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन धर्मशाला क्षेत्र में ही देखा जाए, तो सच्चाई इसके उल्ट है। अब खनियारा से निकलने वाली मांझी खड्ड को ही देख लीजिए। दाड़ी के निकट पास्सू में इस खड्ड के बीच प्रवासी परिवारों की दर्जनों झुग्गियां हैं। इसी तरह चैतड़ू के निकट मनेड में भी खड्ड के बीच झुग्गियों की भरमार है। इन दोनों स्थानों पर सैकड़ों प्रवासी परिवार रहते हैं। ये वही परिवार हैं, जिन्हें पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दाड़ी की चरान खड्ड से हटाया गया था। कोई ठिकाना न मिलते देख इन असहाय परिवारों ने खड्ड में आशियाने बना लिए हैं। लोगों का कहना है कि खड्ड में इन लोगों के रहने से पानी भी दूषित होता है, क्योंकि इन लोगों के लिए खुले में शौच करना मजबूरी है। यही दूषित पानी कूहलों के जरिए खेतों में जाता है। सवाल यह है कि जब दूषित पानी खेत में जाएगा, तो इसका सब्जी और अन्यों फसलों पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में आर्गेनिक और जीरो बजट खेती का कांसेप्ट कैसे सफल हो सकता है। क्षेत्र के सैकड़ों लोगों और किसानों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग उठाई है कि इन लोगों को सही जगह बसाया जाए। साथ ही इन्हें पानी और टायलट की भी व्यवस्था की जाए।  स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इन परिवारों से उन्हें वैसे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इनकी चिंता हो रही है। चूंकि अब बरसात सिर पर है। बरसात में मांझी खड्ड में भारी बाढ़ आती है। ऐसे में यहां बाढ़ किसी भी समय बड़ा भयंकर हादसा कर सकती है।

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