मां की अहमियत

– कमलेश कुमार, कांगड़ा

दुनिया की कठोरता की तपिश में आज भी मां का आंचल ठंडक देता है। कल मदर्स-डे है और आधुनिक युग के सफर में जो बच्चे अपने घर से दूर हैं, वे मीडिया के माध्यम से अपनी माताओं के प्रति अपने स्नेह का परिचय देंगे। अधिकतर बच्चे आज भी मां-बाप की अहमियत से भलीभांति परिचित हैं। बच्चे भी शायद भली प्रकार जानते हैं कि एक मां ही ऐसी है, जो हर गलती को नादानी समझकर माफ करने का हुनर रखती है, वरना समाज आपकी हर भूल की सजा स्वयं तय करता है। वहीं पहली सीख, संस्कार देने वाली मां को ही आधुनिक बच्चों की नई सोच ने अनपढ़ ठहरा दिया है। ऐसे में सब बच्चों को चाहे उनकी माताएं अनपढ़ ही क्यों न हों, उन्हें स्नेह देना चाहिए, क्योंकि सिर्फ मां ही है, जो अनपढ़ होते हुए आपके मनोभावों को पढ़ने का ज्ञान रखती है।

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