मां के रिश्ते को दाग न लगाएं

– राजेश कुमार चौहान

मदर्स-डे मनाने का रिवाज जिन देशों से भारत में आया है, वहां कोई भी मां अपनी बेटी के प्रति संकीर्ण सोच नहीं रखती होगी। दुनिया में मां का रिश्ता निःस्वार्थ का माना जाता है, लेकिन बहुत अफसोस की बात है कि आज समाज में ऐसे कारनामे सामने आ रहे हैं, जो मां के रिश्ते को भी कलंकित कर रहे हैं। आज हमारे देश में सामाजिक बुराई कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ाने में महिलाओं का योगदान कम नहीं है। आज बहुत सी महिलाएं लड़कियों के प्रति संकीर्ण सोच रखते हुए बेटा-बेटी में भेदभाव करती हैं। यह बात कुछ महिलाओं और लोगों को कड़वी अवश्य लगेगी, लेकिन यह अटल सच्चाई है।

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