मानवाधिकार आयोग गठित न होने पर हाई कोर्ट गंभीर

 शिमला –हिमाचल प्रदेश में मानवाधिकार आयोग व लोकायुक्त का गठन न करने पर प्रदेश उच्च न्यायालय ने मामले को बड़ी गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को इस मामले में छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के आदेश जारी किए। मामले पर सुनवाई नौ जुलाई के लिए निर्धारित की गई है। न्यायालय के समक्ष दायर जनहित याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि स्टेट ह्यूमन राइट कमिशन वर्ष 2005 से कार्य नहीं कर रहा है। राज्य सरकार की ओर से इसे क्रियाशील रखने के लिए जरूरी पदों पर नियुक्तियां नहीं की गई हैं, जबकि पिछले 15 सालों में तीन बार सरकारी बदल चुकी है, जिससे लोगों के अधिकारों का हनन होने की स्थिति में उनको तुरंत न्याय दिलवाने के लिए कोई उपयुक्त फोरम नहीं है। याचिका में ऐसे कई उदाहरण दिए गए हैं कि मानवाधिकार आयोग न होने पर लोगों को गुहार लगाने के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़ा। इसी तरह राज्य सरकार की ओर से लोकायुक्त का भी गठन नहीं किया गया है।

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