मालवाहक वाहनों में सवारियां क्यों

सुखदेव सिंह

लेखक, नूरपुर से हैं

अरबों रुपए का बजट सड़क निर्माण पर खर्च करके नेताओं की ओर से विकास का रोना रोया जा रहा है। सड़क निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किए जाते रहे हैं, जिसके चलते आए दिन लोग सड़क दुर्घटनाओं में बेमौत मारे गए हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते सड़क निर्माण का कार्य नेताओं के कुछेक चहेतों को मिलता आया है…

देवभूमि में आस्था के नाम पर लोग मालवाहक वाहनों में सफर करके अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में रोजाना की सड़क दुर्घटनाओं की वजह से देवभूमि की प्रतिष्ठा कहीं न कहीं खराब हो रही है। आए दिन लोगों का इस तरह बेमौत सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाना चिंताजनक विषय है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की वजह से सरकारों की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ी हो जाती है। मालवाहक वाहन जो सिर्फ भारी सामान ढोने के लिए सरकार ने अधिकृत किए हुए हैं। सुरक्षा जागरूकता के बिना लोग ऐसे वाहनों में बेतरतीब ढंग से वाहन की क्षमता से कहीं अधिक सवार होकर सड़क दुर्घटनाओं को न्योता देते जा रहे हैं। एक तरफ पुलिस प्रशासन नो हेल्मेट, नो पेट्रोल का अभियान चला रहा है, मगर वहीं दूसरी तरफ चुनावी बाइक रैलियों में वाहन चालक बिना हेल्मेट सड़कों पर दौड़ाकर पुलिस की इस मुहिम को नेताओं की अगवाई में ठेंगा दिखा रहे हैं। क्या ऐसे माहौल में एक आम आदमी पुलिस की ओर से सुरक्षा संबंधी दी गई हिदायत का पालन कर सकता है? देवभूमि मंदिरों में अपना शीश नवाजने के लिए ऐसे वाहनों में सवार होकर आने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस भी कोई कार्रवाई करने से परहेज करती है।

हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी राज्य होने की वजह से जगह-जगह पर कैंची मोड़ हैं। मालवाहक वाहन चालक अकसर तेज रफ्तार से ऐसे कैंची मोड़ से गुजरते समय लोगों का झुकाव एक तरफ चले जाने से ही वाहन पलट जाते हैं। अगर बात जब इनसान की सुरक्षा की आए, तो ऐसे वाहनों में सफर करना मौत को दावत देने के बराबर होता है। हिमाचल प्रदेश को पर्यटन नगरी बनाने के लिए सरकारें हमेशा ही पहाड़ की जनता को नए सपने दिखाती रही हैं। करोड़ों रुपए का बजट पर्यटन के नाम पर खर्च किया जा रहा है, मगर वास्तविकता तो यह कि इस क्षेत्र में हिमाचल पूरी तरह से सफल नहीं हो पा रहा है। केंद्र सरकारें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत हर गांव को सड़क से जोड़ने में लगी हैं। अरबों रुपए का बजट सड़क निर्माण पर खर्च करके नेताओं की ओर से विकास का रोना रोया जा रहा है। सड़क निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किए जाते रहे हैं, जिसके चलते आए दिन लोग सड़क दुर्घटनाओं में बेमौत मारे गए हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते सड़क निर्माण का कार्य नेताओं के कुछेक चहेतों को मिलता आया है। कहने को तो सड़कों पर कोलतार बिछाया जा रहा है, लेकिन कुछेक दिनों में ही यह उखड़कर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता जा रहा है। सड़कों पर सिर्फ कोलतार बिछाने के सिवाय और कोई दूसरा सुरक्षा का प्रबंध किया गया नजर नहीं आता है। सड़कों का निर्माण करने वाले कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं होते, तो आम जनता की चिंता करने वाला कौन हो सकता है। सड़कों के बीच पत्थर, बजरी, रेत और मिट्टी के ढेर लगा रखे होते हैं। महीनों सड़क निर्माण कार्य की आड़ में नियमों को ठेंगा दिखाया जाता है, मगर कोई भी इस बारे में सोचना नहीं चाहता है। सड़कों पर तारकोल की पतली सी परत चढ़ाई जाती है, जो जल्दी ही उखड़कर वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। सड़कों के किनारे नालियों का अभाव नतीजतन बारिश का पानी सड़कों पर बहकर कोलतार को भी साथ बहाकर ले जाता है। एक तो सड़कों का लेवल समतल नहीं, ऊपर से सड़कों के किनारों पर मिट्टी बराबर नहीं होने  की वजह से अकसर सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के चलते अब दुर्गम इलाकों की सड़कों के किनारों पर पैरापिट लगे होना समय की मांग बनता जा रहा है। लोक निर्माण विभाग की लापरवाही की वजह से हर साल बरसात का पानी सड़कों को बहाकर अपने साथ ले जाता है। प्रदेश सरकारें इसके लिए प्रकृति को कसूरवार ठहराकर केंद्र सरकार से पुनः सड़कों की मरम्मत करवाने के लिए बजट मंजूर करवाकर अपनी कमजोरियां छिपाती आ रही हैं। पहाड़ में एक तो सड़कों की हालत सही नहीं, ऊपर से अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का न होना भी पहाड़ की जनता के लिए परेशानियों का कारण बन जाता है। भारी बरसात के कारण अकसर सड़कें पानी में बह जाती हैं और भू-स्खलन से धंस जाती हैं। ऐसी प्राकृतिक आपदा की घड़ी में पहाड़ के लोगों को ही यातायात की समस्याओं से जूझना पड़ता है।

ऐसे हालात में फिर पर्यटकों का हिमाचल प्रदेश में घूमने आना उनकी आशाओं पर पानी फेर जाता है। प्रदेश सरकार जिला मंडी में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने का खाका तैयार कर चुकी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की पहल पर पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेलवे ट्रैक पर पारदर्शी एक्सप्रेस ट्रेन भी अब चल पड़ी है, मगर ल्हासे गिरने के कारण उसकी आवाजाही भी फिलहाल बंद है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जब से प्रदेश की कमान संभाली है, तब से वह हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से नजदीकियों की वजह से ही पहाड़ की सड़कों का अब कायाकल्प होने के कयास लगाए जा रहे हैं। उम्मीद की जा सकती है कि अगर राज्य मार्ग सच में राष्ट्रीय राजमार्गों में तबदील हो गए, तो हिमाचल प्रदेश देश के मानचित्र में पर्यटन के लिहाज से प्रथम राज्य में आंका जाएगा। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए राजमार्गों को दुरुस्त करके पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों किनारे पैरापिट सरकार को लगाने चाहिए। कैंची मोड़ों पर स्पीड लिमिट के सावधानी बोर्ड लगाने होंगे। नशा करके देवभूमि में वाहन चलाने वालों की अल्कोहल सेंसर से जांच की जानी चाहिए। मालवाहक वाहनों में सवार होकर यात्रा करने वालों को सुरक्षा संबंधी जानकारी मुहैया करवानी चाहिए। पुराने वाहनों को रोड से हटवाना और नौसिखिए, चालकों पर नकेल कसने से ही सड़क हादसों पर अंकुश पाया जा सकता है।

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