मिड-डे मील को अलग से बजट नहीं

शिक्षा विभाग का प्रोपोजल केंद्र ने किया नामंजूर, अब चुनावों के बाद फैसला

शिमला -हिमाचल में प्री-नर्सरी में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को भारत सरकार ने दोपहर के खाने के लिए अलग से बजट स्वीकृत नहीं किया है। हिमाचल से शिक्षा विभाग द्वारा भेजे गए मिड-डे मील के प्रोपोजल को केंद्र सरकार ने नामंजूर कर यह तर्क दिया है कि पहले की तरह ही चुनाव तक शिक्षा विभाग मिड-डे मील का प्रबंध करें। यानी कि मिड-डे मील के लिए जो बजट कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्रों को मिलता है, उसी बजट से अब स्कूलों को अपने लेवल पर प्री-नर्सरी के नौनिहालों को दोपहर का खाना देना होगा। बता दें कि  दिल्ली में हुई प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने लगभग 25 हजार प्री-नर्सरी छात्रों को बजट देने की मांग उठाई थी। इस दौरान एमएचआरडी ने साफ किया है कि चुनाव के बाद इस मामले पर कैबिनेट में मंजूरी ली जाएगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद ही प्री-नर्सरी के छात्रों के लिए मिड-डे को लेकर अलग से बजट जारी होगा। दरअसल भारत सरकार के निर्देशों के बाद 3391 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं पिछले साल से शुरू की गई हैं। वर्तमान में सरकारी स्कूलों में 25 हजार से भी ज्यादा छात्रों की संख्या प्री-प्राइमरी में हो चुकी है, ऐसे में एक साथ इतने छात्रों को दोपहर का खाना दूसरे छात्रों के बजट में से देना शिक्षा विभाग व स्कूल प्रबंधन के लिए टेढ़ी खीर हो गई है। जानकारी के अनुसार इस बार प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने 120 करोड़ का बजट केंद्र को मिड-डे मील के लिए दिया था, उसमें से 85 करोड़ तक का बजट स्वीकृत हुआ है। बाकी बजट राज्य सरकार को मिड-डे मील के लिए खर्च करना होगा। बता दें कि दिल्ली में बैठक के दौरान एमएचआरडी ने यह हवाला दिया है कि छह साल की आयु से कम छात्र आरटीई के दायरे में नहीं आते हैं। इसी वजह कैबिनेट में मंजूरी न मिलने तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। बता दें कि भारत सरकार मिड-डे मील पर जो बजट स्कूलों को देती है, उसमें हर छात्र को एक दिन में कितनी डाइट दी जानी है, इसी हिसाब से बजट पारित किया जाता है। अब जब केंद्र से प्री-नर्सरी के लिए कोई बजट ही नहीं है, तो अंदेशा यह भी जताया जा रहा है कि इससे मिड-डे मील के हिसाब किताब में भी गड़बड़ी सामने आएगी।

 

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