मृत्युंजय जप कैसे करें

May 25th, 2019 12:05 am

श्री देवी जी कहती हैं-हे देवदेवेश, हे देवताओं से प्रपूजित, हे भगवान, आपने मुझसे सब कुछ कहा, परंतु मृत्युहर, सर्व रक्षाकर, अशुभनाशक कवच नहीं कहा। कृपया कर कहिए, यदि मेरे ऊपर आपका परम स्नेह है तो। श्री शिवजी न कहा – इस मृत्युंजय मंत्र के वामदेव ऋषि गायत्री छंद मृत्युंजय देवता हैं। साधकों के मनोरथ सिद्धि के लिए विनियोग कहा है। मृत्युंजय सदाशिव मेरे शिर की, तीन अक्षरस्वरूप महेश्वर मेरे मुख की रक्षा, पंचवर्णात्मक भगवान, सदाशिव मेरी दोनों भुजाओं की और मृत्युंजय मेरी आयु की रक्षा करें…

-गतांक से आगे…

मृत्युंजय कवचम्

श्री देव्युवाच-भगवान देवदेवेश देवताभिः प्रपूजिः। सर्व में कथित देव कवचं न प्रकाशितम्।। मृत्युरक्षाकर देव सर्वाशुभविनाशम्। कथयस्वाद्य में नाथ यदि स्नेहोअस्ति मां प्रति। अब मृत्युंजय कवच कहते हैं। श्री देवी जी कहती हैं-हे देवदेवेश, हे देवताओं से प्रपूजित, हे भगवान, आपने मुझसे सब कुछ कहा, परंतु मृत्युहर, सर्व रक्षाकर, अशुभनाशक कवच नहीं कहा। कृपया कर कहिए, यदि मेरे ऊपर आपका परम स्नेह है तो। श्री शिवजी न कहा – इस मृत्युंजय मंत्र के वामदेव ऋषि गायत्री छंद मृत्युंजय देवता हैं। साधकों के मनोरथ सिद्धि के लिए विनियोग कहा है। मृत्युंजय सदाशिव मेरे शिर की, तीन अक्षरस्वरूप महेश्वर मेरे मुख की रक्षा, पंचवर्णात्मक भगवान, सदाशिव मेरी दोनों भुजाओं की और मृत्युंजय मेरी आयु की रक्षा करें। बिल्व वृक्ष के नीचे वास करने वाले अव्यय सदाशिव, दक्षिणामूर्ति षट्त्रिशत (36) वर्ण रूप धारण करने वाले सर्व स्थानों में मेरी रक्षा करें। द्वाविशति रूपात्मक रुद्र मेरी कुक्षि की, त्रिवर्णात्मक नीकंठ मेरे कंठ की, बीज पूरे में चिंतामणि के तुल्य अर्द्धनारीश्वर भगवान सदाशिव मेरे गुह्यभाग की, त्रिवर्णात्मक, कटिरूप, महेश्वर, मार्तंडभैरव नित्य मेरे पांव की, ओं जूं सः इन बीजों के रूप को धारण करने वाले त्रिपुरांतक मेरे ऊर्ध्वभाग अर्थात मस्तक की, गिरिनायक महादेव दक्षिण दिशा में अधोराख्य महादेव पूर्व दिशा में, वामदेव पश्चिम दिशा में और सद्योजात स्वरूप उत्तर दिशा में मेरी रक्षा करें। हे देवी देवताओं को भी दुर्लभ ऐसे रक्षाकर कवच का प्रातःकाल और सायंकाल जो मनुष्य शिव मंदिर में पाठ करते हैं, उनको इस कवच के प्रसाद से वांछित फल प्राप्त होता है। जो साधक इस परम पवित्र कवच को दक्षिण भुजा में धारण करते हैं, उनको संपूर्ण संपत्तियां प्राप्त होती हैं और उनके समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं। योगिनी, भूत, बेताल आदि कदापि उसकी हिंसा नहीं करते, किंतु पुत्रवत उसकी रक्षा करते हैं। हे देवि, यथाविधान इस कवच का पाठ करके शिवपूजन करें। एक लाख मूल मंत्र के जप करने से एक पुरश्चरण होती हैं। हे देवी, इस पुरश्चरण के करने से मृत्यु और रोग नष्ट होता है। इस प्रकार करने से सद्गति प्राप्त होती है। हे देवी, इस कवच के ज्ञाता मृत्यु से निर्भय रहते हैं। न करने से सिद्धि की हानि होती है। हे महादेव, तुम्हारे स्नेह से शुभ कवचराज ने कहा है। हे भद्र, अपनी सब कामना पूर्ण करने की इच्छा करने वाला अन्य को यह कवच न दे। पूजन विधान प्रथम कह आए हैं। मृत्युंजय कवच समाप्त। 

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या हिमाचल में सियासी भ्रष्टाचार बढ़ रहा है?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz