मेला खत्म …स्कूल के बाहर गंदगी के ढेर

बालीचौकी में स्वच्छता अभियान को ठेंगा,मेले के बाद सफाई करना भूला प्रशासन

बालीचौकी -जिलास्तरीय बालीचौकी मेला 27 मई को आधिकारिक रूप से संपन्न हो गया। पांच दिवसीय देव मेला देव चुंजवाला व ऋषि मार्कंडेय का है और मेला इन दो देवताओं व पाठशाला के मैदान में मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष मेला अपने पीछे ढेर सारे सवाल छोड़ गया। मेले का नाम अगर मिलन है तो इस मेले का ये पक्ष भी अपने साथ न्याय नहीं कर पाया न तो इस दौरान नरों के मन का मिलन हुआ और न ही नारायण आपस में मिलेते हुए नजर आए। अंतिम दिन देवताओं की जिस तरह से मेला मैदान से विदाई हुई वो निःसंदेह खुशी देने वाली नहीं रही। देव रथ एक दूसरे से मिले बिना या विदाई संवाद के अपने अपने गंतव्य की ओर चले गए। इसके अलावा मेले में व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल इतने गंभीर हैं कि मेला कमेटी, स्कूल प्रशासन व स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच ही नहीं सकते हैं। सफाई को लेकर मेला मैदान में कोई भी सफाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं कि गई थी। आलम यह है कि स्कूल मैदान में स्कूली छात्रों के लिए लगाए गए हैंडपंप के पास शौच इत्यादि के अलावा तमाम तरह की जूठन फेंकी जा रही है। पाठशाला के प्रवेशद्वार के साथ बियर की खाली बोतलों का ढेर लगा हुआ है। मेला मैदान में एक भी अस्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई। नतीजन रावमापा बालीचौकी के छात्र-छात्राओं के लिए निर्मित शौचालयों में अंदर बाहर व तीर्थन में हर जगह गंदगी ही गंदगी फैल चुकी है। पाठशाला के कमरों के अंदर और 200 मीटर के दायरे में पेशाब की बदबू अपना स्थान बना चुकी है। पत्रकार परिषद बालीचौकी मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश जयराम ठाकुर से भी निवेदन करेंगे कि बालीचौकी क्षेत्र के इस ऐतिहासिक जिला स्तरीय मेले को प्रत्यक्ष रूप से सार्वजनिक हाथों में या प्रशासन को सौंपा जाए ताकि व्यकितगत खुन्नस के चलते ये मेला दो या चार व्यक्तियों तक न सिमट जाए। कई सालों से जिला स्तरीय बालीचौकी मेला तनाशाही का शिकार होता जा रहा है।

 

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