मोदी की सुनामी में उखडे विपक्षी दलों के पैर

मोदी की सुनामी में उखडे विपक्षी दलों के पैर

नई दिल्ली-केन्द्र में पांच साल के शासन के बल पर मोदी लहर ने इस लोकसभा चुनाव में सुनामी का रूप ले लिया जिसमें न केवल देश के पश्चिम और उत्तरी भाग बल्कि पूर्वी हिस्से में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपने विरोधियों के पैर उखाड़ दिये और लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। इस सुनामी का असर इतना व्यापक रहा कि दक्षिण के तीन राज्यों को छोड़कर पूरा देश मोदीमय हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता के आगे एक बार फिर कांग्रेस की तमाम रणनीति और लुभावने वादे धराशायी हो गये और पिछली बार की तरह उसे इस बार भी मुंह की खानी पड़ी। पार्टी करीब एक दर्जन राज्यों में अपना खाता भी नहीं खोल पायी और पचास सीटों के अंदर ही सिमट गयी। श्री मोदी के करिश्मे के बल पर भाजपा ने पहली बार लोकसभा में 300 के आंकडे के पार छलांग लगायी और वर्ष 1971 के बाद यह दूसरा मौका होगा जब किसी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उनकी पार्टी की लगातार दूसरी बार बहुमत की सरकार बनेगी। श्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी के नेतृत्व में भाजपा ने जो बुलंदी हासिल की है उसके सामने अटल-आडवाणी की उपलब्धि भी धूमिल हो गयी। पार्टी ने पश्चिम और उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में लगातार दूसरी बार अपना एकक्षत्र वर्चस्व कायम किया, वहीं बिहार और महाराष्ट्र में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर विरोधियों का पूरी तरह सफाया कर दिया। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सुश्री ममता बनर्जी के किले को तोड़कर अपने पैर मजबूती से गाड़ दिये। वह 18 सीटों पर जीत रही है जबकि पिछली बार सिर्फ दो सीट मिली थी। राज्य में तृणमूल को 22 सीटें मिल रही हैं। ओडिशा में भी भाजपा नम्बर दो पार्टी बनकर उभरी है। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को भी धत्ता बताकर उसने 60 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है। उसने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से उनकी परंपरागत अमेठी सीट छीनकर नेहरू-गांधी परिवार को पहली बार करारा झटका दिया है। गत दिसम्बर में कांग्रेस के हाथों तीन राज्य गंवाने वाली भाजपा ने इस चुनाव में उसे करारा जवाब दिया है और इन राज्यों की लगभग सभी सीटों पर जीत हासिल की है। श्री मोदी ने वाराणसी और श्री शाह ने गांधीनगर सीट पर भारी मतों से जीत हासिल की है। पार्टी के सभी दिग्गज नेता भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। इस चुनाव में प्रचंड जीत के बावजूद भाजपा तमिलनाडु , आन्ध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में खाता नहीं खोल पायी।

 

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