मोदी…मोदी…मोदी

 नमो की आंधी में उड़ा विपक्ष, एनडीए को फिर से प्रचंड बहुमत, भाजपा अकेले 300 पार, अमेठी में अपना गढ़ भी नहीं बचा पाए राहुल गांधी, हिमाचल, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, चंडीगढ़ में विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ, मध्य प्रदेश, बिहार में एक-एक सीट ही जीत पाए विरोधी, दक्षिण में पिटा भगवा दल

नई दिल्ली -कांग्रेस ‘गरीबी पर वार, 72 हजार’ के नारे के साथ इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देने की रणनीति के साथ उतरी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘चौकीदार’ अभियान, बालाकोट हवाई हमला, राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के आक्रामक प्रचार के आगे बरी तरह से पस्त हो गई। तमाम एग्जिट पोल्स को सही ठहराते हुए भाजपा नीत एनडीए ने 2014 के प्रदर्शन को भी पछाड़ते हुए प्रचंड बहुमत हासिल कर लिया। अकेले भाजपा ही तीन सौ से ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने वाले पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद तीसरे प्रधानमंत्री बन गए। इस चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की स्थिति यह रही कि वह 2014 के अपने 44 सीटों के आंकड़ों में महज कुछ सीटों की बढ़ोतरी ही कर पाई, लेकिन नेता विपक्ष का पद पाने के लिए जरूरी 55 सीटें भी हासिल नहीं कर पाई। मोदी की सुनामी से खुद कांग्रेस अध्यक्ष भी नहीं बच पाए और अपने ऐतिहासिक किले अमेठी से चुनाव हार गए। हालांकि वह केरल की वायनाड सीट से चार लाख से ज्यादा मतों से चुनाव जीत संसद में एंट्री का टिकट हासिल करने में सफल रहे। प्रधानमंत्री की सुनामी का ही असर था कि गुजरात, राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली, जैसे राज्यों में तो विपक्षी पार्टियां खाता भी नहीं खोल सकीं, जबकि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में विपक्ष की उपस्थिति नाममात्र की ही रही। ममता बनर्जी के राज्य में भी भाजपा ने अभूतपूर्व जीत हासिल करते हुए 17 सीटें जीतते हुए टीएमसी की चूलें हिला डालीं। ओडिशा में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि केरल और पंजाब में कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करने में सफल रही, लेकिन पूरे देश में उसकी हालत दयनीय ही रही। तमिलनाडु में डीएमके के सहयोग से यूपीए पिछले चुनावों के मुकाबले कुछ हद तक सम्मान बचा पाया, लेकिन सौ का आंकड़ा छूने से दूर ही रहा। यूपी में सपा-बसपा गठबंधन भी अपने इरादों में सफल नहीं हुआ और जनता ने जातपात की राजनीति को नकारते हुए भाजपा को फिर से शानदार जीत मिली।

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