राजस्थान में बदली वीर सावरकर की कहानी

कांग्रेस सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर के चैप्टर में किया बदलाव

जयपुर -राजस्थान में हर सरकार में विचारधारा के आधार पर इतिहास के पन्नों में उलटफेर करने का सिलसिला सा बन गया है। वर्तमान कांग्रेस की सरकार में पाठ्यक्रम में बदलाव करने के इस क्रम में नया नाम जुड़ा है स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर उर्फ वीर सावरकर का, जिन्हें देशभक्त नहीं, बल्कि अंग्रेजों से माफी मांगने वाला बताया गया है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने जानकारी देते हुए बताया कि वीर सावरकर जैसे लोग, जिनका देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कोई भी योगदान नहीं है, उनका गुणगान किताबों में किया गया है। जब हमारी सरकार सत्ता में आई तो इन चीजों के विश्लेषण के लिए समिति का गठन किया गया। अब किताबों में जो कुछ भी है, वह पुख्ता सबूतों पर आधारित है। इससे पहले जनवरी में महाराष्ट्र के नासिक की यशवंतराव चव्हाण ओपन यूनिवर्सिटी भी उस समय विवादों में घिर गई, जब वीर सावरकर को हिंदुत्व विचारधारा वाले कट्टरपंथी (जहालवादी) और दहशतवादी (आतंकवादी) व्यक्ति बताया गया। इस किताब के एक चैप्टर, ‘दहशतवादी क्रांतिकारी आंदोलन’ में वीर सावरकर से लेकर वासुदेव बलवंत फड़के, पंजाब के रामसिंह कुका, लाला हरदयाल, रास बिहारी बोस जैसे क्रांतिकारियों के नाम शामिल थे। बता दें कि राजस्थान में इससे पहले की बीजेपी सरकार ने भी पाठ्यक्रम में बदलाव किया था। पूर्ववर्ती सरकार ने पाठ्यक्रमों में से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के काफी अंश को हटा लिया था और आरएसएस विचारक वीर सावरकर के बारे में विस्तार से लिखा गया था। बीजेपी की पिछली सरकार ने मुगल शासकों को सामूहिक हत्यारा और हिंदू शासकों को कई लड़ाइयों में जीतने वाला बताया था। दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए तैयार की गई सोशल साइंस की नई किताब बताया गया कि ‘महाराणा प्रताप ने अकबर को 1576 में हल्दीघाटी की लड़ाई में हराया था।’ हालांकि, महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध पर इतिहासकारों की अलग-अलग राय है। बता दें कि इस लड़ाई में मुगल विजयी हुए थे और पृथ्वीराज चौहान भागने में कामयाब रहे थे।

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