रैलियों ने चौगान को दिए गहरे जख्म

नाहन—सिरमौर रियासतकाल व अंग्रेजों के जमाने का ऐतिहासिक चौगान मैदान विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से दिए गए जख्मों से कराह रहा है। चौगान मैदान के घाव सबसे अधिक यहां पर अभ्यास करने वाले खिलाडि़यों को दिखाई देते हैं। जिला प्रशासन व नगरपालिका परिषद चौगान मैदान को नियम के मुताबिक आमदनी के लिए किराए पर देने को विवश हैं, परंतु नाहन के वह खिलाड़ी कहां जाएं जिनके लिए नाहन का चौगान मैदान खेलों के लिए अभ्यास का एक केंद्र है। आए दिन चौगान मैदान में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। भले ही इससे नगर परिषद को आमदनी होती हो परंतु कार्यक्रम वे रैलियों के बाद चौगान मैदान को जो जख्म मिलते हैं उसकी सिसकियां कई दिनों तक सुनाई देती हैं। कई बार तो हालत यह होती है कि विभिन्न प्रकार की रैली व राजनीतिक दलों के लिए किराए पर दिए जाने के बाद चौगान मैदान में टैंट आदि के लिए खोदे गए गड्ढे खिलाडि़यों के दुर्घटना का कारण बनते हैं। गौर हो कि नाहन शहर जिला मुख्यालय होने के चलते जिला भर के लोगों का आकर्षण का केंद्र है। यहां का ऐतिहासिक चौगान मैदान खिलाडि़यों की अभ्यास का एक केंद्र है। हाल ही में चौगान मैदान में जहां 10 दिनों तक जोड़ मेला चला, वहीं राजनीतिक रैली के लिए भी चौगान को 10 दिनों के लिए आरक्षित कर दिया गया था, जिससे खिलाड़ी चौगान मैदान में अभ्यास करने से महरूम रह गए थे। गौर हो कि चौगान मैदान को बरसात के दौरान खेलने व किसी भी प्रकार की गतिविधियों के लिए बंद किया जाता है। नगर परिषद द्वारा चौगान मैदान का कई बार समतलीकरण भी किया जा चुका है तथा मैदान में करीब तीन बार घास भी लाखों रुपए की राशि खर्च कर लगाई जा चुकी है, परंतु फिर भी चौगान मैदान में कोई भी घास अभी तक चौगान की हरियाली बढ़ाने में सफल नहीं हो पाया है। नाहन शहर के वरिष्ठ नागरिक प्रेमपाल महेंद्रु, पर्यावरण समिति के अध्यक्ष डा. सुरेश जोशी, साई समिति के अध्यक्ष प्रो. अमर सिंह, सेवानिवृत्त अधिकारी कुंदन चौहान, डा. इंद्र सिंह, पूर्व खिलाड़ी मनोज पटेट, दिनेश चौधरी आदि का कहना है कि चौगान मैदान केवल खिलाडि़यों के लिए रखा जाना चाहिए, ताकि विभिन्न प्रकार के आयोजनों से चौगान मैदान में लगने वाले जख्मों को रोका जा सके। इसके अलावा जुलाई व अगस्त माह में चौगान मैदान को पुलिस व होमगार्ड की निगरानी में पूर्ण रूप से बंद किया जाना चाहिए, ताकि इस पर घास उगाई जा सके।

तीन बार बदली जा चुकी लोहे की रैलिंग

नाहन के ऐतिहासिक चौगान मैदान के चारों ओर लगाई गई लोहे की रैलिंग लाखों रुपए खर्च कर तीन बार बदली जा चुकी है। चौगान मैदान के चारों ओर पहले लोहे की पाइप होती थी तथा यह पाइप दिन भर लोगों के चौगान मैदान के आसपास बैठने का जरिया होता था। इन पाइपों को हटवा दिया गया तथा नुकीली ग्रिल चौगान के चारों ओर करीब एक दशक पूर्व लगवा दी गई थी। फिर तीसरी बार चौगान की रैलिंग को हटाया गया तथा शिमला रिज की तर्ज पर चौगान के चारों ओर अनारकली ग्रिल लगाई गई है।

You might also like