लोकसभा चुनाव : एक शिक्षक के जिम्मे 100 छात्र

राजधानी के सरकारी स्कूलों में दर्जनों शिक्षकों की लगी चुनावी ड्यूटी; शिक्षा विभाग ने स्कूल वाइज मांगा शिक्षा उपनिदेशक से ब्यौरा,स्कूल में शिक्षक न होने पर रद्द करवाई जाएगी ड्यूटी

शिमला -राजधानी शिमला में लोकसभा चुनाव को लेकर जहां सभी सरकारी विभागों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है, वहीं अब शिक्षकों को भी चुनावी ड्यूटी के लिए जगह- जगह पर भेज दिया गया है। ऐसे में अब शिमला जिला के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हंै। वहीं लगभग 30 से 35 ऐसे भी स्कूल हैं, जहां पर एक ही शिक्षक सौ से ज्यादा छात्रों को पढ़ा रहे हंै। जानकारी के अनुसार स्कूलों में शिक्षक चुनाव की तैयारियों में इस तरह से व्यस्त है कि कक्षाओं में तक जाने का समय उनके पास नहीं है। ऐसे में अब छात्रों की पढ़ाई काफी बाधित हो रही है। बताया जा रहा है कि  अधिकतर सरकारी स्कूलों में छात्र पूरे दिन में केवल दो घंटे भी बड़ी ही मुश्किल से पढ़ाई कर पा रहे हैं। हालांकि विभागीय जानकारी के अनुसार दर्जनों शिक्षकों ने अपनी चुनावी ड्यूटी कैंसिल भी करवा दी है। शिमला जिला में तीन से चार हजार शिक्षकों में से पच्चास प्रतिशत शिक्षक चुनावी ड्यूटी दे रहे हंै। हैरानी इस बात की है कि सरकारी स्कूल में भी इन दिनों विभिन्न चुनाव अधिकारियों के निरीक्षण सरकारी स्कूलों में हो रहे हंै। इस वजह से भी स्कूलों में शिक्षक बीएलओ और चुनाव निरीक्षण में भी काफी व्यस्त होने की वजह से कक्षाएं नहीं लगा रहे हैं। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शिमला जिला के कई सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही है। यही वजह है कि  शिक्षा विभाग ने भी  शिक्षकों की ड्यूटियों को ज्यादातर कैंसल करवाने के आदेश शिक्षा उपनिदेशक को जारी कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि  लोकसभा के चुनाव देश की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन विभिन्न शिक्षक संगठनों की यह मांग है कि  शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी से इस वजह से दूर रखा जाएं, ताकि छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर न पढ़े। बता दें कि शिक्षकों का यह भी तर्क है कि  हर साल रिजल्ट खराब होने की वजह यह भी है कि उन्हें चुनाव के दो माह पहले ही व्यस्त कर दिया जाता है। हालांकि शिक्षा विभाग ने इस बार यह भी दावा किया है कि इस बार गैर शिक्षक कर्मचारियों की ही ड्यूटी चनाव में लगाई गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर चुनाव में शिक्षकांे की बहुत कम ड्यूटी लगाई गई है, तो छात्रों की पढ़ाई क्यों प्रभावित हो रही है। बता दें कि राजधानी के ही लगभग दस ऐसे स्कूल हंै, जहां पर शिक्षक केवल नाममात्र रह गए हंै। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को भी छात्रों की पढ़ाई को सुचारू रखना मुश्किल हो रहा है। दरअसल शिमला व जिला के कई क्षेत्रों में कई ऐसे भी स्कूल हैं, जहां पर केवल एक ही शिक्षक है, और उक्त शिक्षक भी स्कूल में चुनाव के कार्य कर रहा है। शिक्षा विभाग ने फिलहाल जिला उपनिदेशक से शिक्षकों की लगी चुनावी ड्यूटी का ब्यौरा मांगा है, वहीं कहा गया है कि  स्कूल वाइज यह जानकारी भेजी जाए। शिक्षा अधिकारियों का मानना है कि अगर किसी स्कूल में शिक्षक न होने की वजह से पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो उक्त स्कूल में सेवाएं देने वाले शिक्षक की ड्यूटी कैंसिल की जाएगी। बता दें कि शिक्षा विभाग ने पिछले साल कहा था कि बेहतर रिजल्ट के लिए शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी से भी राहत दी जाएगी।

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