वजीफे के लिए देना होगा एफिडेविट

250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले के बाद शिक्षा विभाग ने तय किए नए सख्त नियम, रोजाना छात्रों की हाजिरी डिटेल भेजना भी जरूरी

शिमला – प्रदेश शिक्षा विभाग 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले के बाद अब हरकत में आ गया है। विभाग ने फैसला लिया है कि अब निजी शिक्षण संस्थानों को एफिडेविट के बिना स्कॉलरशिप खाते में नहीं जाएंगी। जी हां, अब प्रदेश व बाहरी राज्यों के निजी शिक्षण संस्थानों को ओबीसी, एसटी व एससी छात्रों की फीस देने का सूबत विभाग को देना होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने नए नियम तय किए हैं। जानकारी के अनुसार निजी शिक्षण संस्थानों को अब छात्रों की फीस कंम्पोंनेंट और एफिडेविट पर यह बताना होगा कि वह कितने पात्र छात्रों की फीस भर रहे है। बता दें कि शिक्षा विभाग ने इस साल से ही नए नियम सभी निजी शिक्षण संस्थानों पर लागू कर दिए हैं। निजी शिक्षण संस्थानों को इस बारे में अवगत करवाकर कहा गया है कि  अब अगर स्कॉलरशिप संस्थान को अपने खाते में चाहिए, तो जारी निर्देशों के अनुसार सभी  नियमों का पालन करना होगा। विभागीय जानकारी के अनुसार फिलहाल यह नियम सरकारी स्कूल व कालेजों के लिए लागू नहीं किए गए हैं। खास बात यह है कि अब निजी शिक्षण संस्थानों से भी फीस को लेकर भेजे गए एफिडेविट को भी विभाग में वजीफे को लेकर बनाई गई कमेटी वेरिफाई करने के बाद संस्थानों को राशि जारी करेंगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा  बताया गया है, कि फीस का रिकार्ड भेजने के साथ ही शिक्षण संस्थानों को छात्रों की रोजाना की हाजिरी भी देनी होगी, ताकि यह पता लगाया जा सकें कि छात्र उक्त संस्थान में पढ़ाई कर भी रहा है या नहीं। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पात्र वजीफे के तहत मैंनेटेनेस का पैसा सीधे छात्रों के  ही खाते में जाएगा। बताया जा रहा है कि छात्रों को छात्रवृत्ति के लिए भारत सरकार की ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर अपना मोबाइल नंबर डालना होगा। विभाग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि छात्रवृत्ति के आबंटन को लेकर अब कोई घोटाला न हो, इसके लिए एक आधार नंबर पर एक ही बार राशि जारी होगी।  विभाग का दावा है कि अब छात्रवृत्ति के आबंटन को लेकर सभी कार्य पारदर्शिता से किए जा रहे हैं। विभाग का मानना है कि अब घोटाले को लेकर कोई भी गुजाइंश नहीं है। दरअसल छात्रवृत्ति के घोटोले से बचने के लिए विभाग ने  अपने लेवल पर स्टैंडड आपरेटिंग सिस्टम तैयार भी किया है।  स्टैंडर्ड आपरेटिंग सिस्टम के तहत तीन अधिकारियों के पास अलग-अलग कोड दिया गया है। इसके तहत संस्थानों से स्कॉलरशिप से जो आवेदन और कितने छात्रों को स्कॉलरशिप दी जा रही है या फिर अभी तक दी गई है।  तीन जगहों से वेरिफाई किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने वजीफे  जारी करने से पहले एफिडेविट की शर्त के अलावा मॉनीटरिंग सैल बनाने को लेकर भी निर्देश संस्थानों को जारी किए हैं। 

पांच सदस्यीय कमेटी एफिडेविट पर रखेगी नजर

शिक्षा विभाग में पांच संदस्य कमेटी विशेष तौर पर ऐसी गठित की जाएंगी, जो केवल निजी शिक्षण संस्थानों से आए एफिडेविट पर ही नजर रखेंगी। 

 

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