वाकनाघाट में नहीं बनेगा आईटी पार्क

खाली पड़ी 331 बीघा जमीन को किसी और प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी में सरकार

शिमला – सोलन जिला के वाकनाघाट में आईटी विभाग की 331 बीघा जमीन पर बिना कनेक्टिविटी आईटी पार्क नहीं बन सकेगा। वर्ष 2004 में पूर्व की वीरभद्र सरकार ने वाकनाघाट में आईटी सेक्टर को विकसित करने के लिए 331 बीघा जमीन देखी थी, लेकिन 14 साल बीतने के बाद अब जयराम सरकार इस जमीन को निजी क्षेत्र में निवेश करने की सोच रही है। आईटी विभाग की इस जमीन को विकसित करने के लिए सबसे पहले सड़क, बिजली व पानी के लिए विकास करना है, जो नहीं हो पाया। करीब 14 वर्षों से लावारिस इस जमीन को विकसित करने के लिए कम से कम 80 करोड़ की राशि चाहिए। बताया जा रहा है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2004 में इस मसले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया था और उस वक्त सड़क, बिजली और पानी के लिए 20 करोड़ की मांग की थी, मगर केंद्र से सहायता नहीं मिली। वर्तमान में प्रदेश की जयराम सरकार सैकड़ों बीघा इस जमीन का सदुपयोग करने के लिए नया प्रस्ताव तैयार करने जा रही है। बताया गया कि प्रदेश में दो आईटी पार्क स्थापित होने हैं, जिसमें से एक पार्क शिमला के मैहली में स्थापित होना है। इसका शिलान्यास भी हो चुका है, जबकि दूसरा कांगड़ा के गगल में तैयार होना है। इसके लिए आईटी विभाग ने जगह भी तलाश ली है।  वाकनाघाट में ही आईटी पार्क स्थापित करने पर बात भी चलती रही, लेकिन कनेक्टिविटी न होने के कारण आईटी पार्क यहां नहीं बन पाया। ऐसे में अब प्रदेश सरकार इस जमीन पर निजी क्षेत्र में निवेश के लिए प्रस्ताव तैयार करेगी। बहरहाल अरसे से लावारिस पड़ी इस जमीन का सही इस्तेमाल करने की योजना सरकार बना रही है। इसके लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।  सरकार इस जमीन का सुदपयोग करते हुए यहां कोई संस्थान या उद्योग खोलने के लिए इसे निजी क्षेत्र को दे सकती है

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