व्यापार घाटे की नई चिंताएं

May 13th, 2019 12:07 am

डा. जयंतीलाल भंडारी

विख्यात अर्थशास्त्री

 

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के कई पड़ोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान को भारत के निर्यात बढ़ने की संभावनाएं हैं। ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका में भी निर्यात बढ़ने की संभावना है। इसी तरह म्यांमार और मलेशिया सहित आसियान देशों को भी निर्यात बढ़ सकते हैं। इनके साथ-साथ कई विकसित देशों में भी भारत के निर्यात बढ़ने की संभावना दिखाई दे रही है। जरूरी है कि सरकार द्वारा अन्य देशों की गैर शुल्कीय बाधाएं, मुद्रा का उतार-चढ़ाव, सीमा शुल्क अधिकारियों से निपटने में मुश्किल और सेवा कर जैसे निर्यात को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों पर ध्यान देना होगा…

यकीनन देश के विदेश व्यापार मानचित्र में बढ़ते हुए विदेश व्यापार का बढ़ता हुआ ग्राफ रेखांकित हो रहा है। हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने पिछले वित्त वर्ष 2018-19 से संबंधित भारत के विदेश व्यापार के आंकड़े जारी किए हैं। इनके मुताबिक वर्ष 2018-19 में भारत के निर्यात नौ फीसदी बढ़कर 331 अरब डालर पर पहुंच गए, यद्यपि निर्यात का यह रिकार्ड स्तर है, लेकिन निर्यात के 350 अरब डालर के लक्ष्य से कम ही है। इसी तरह पिछले वित्त वर्ष में देश का आयात भी करीब नौ फीसदी बढ़कर 507 अरब डालर मूल्य का रहा। ऐसे में पिछले वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान व्यापार घाटा बढ़कर करीब 176 अरब डालर के रिकार्ड स्तर पर रहा, जो वर्ष 2017-18 में 162 अरब डालर था। ऐसे में यह संतोषजनक है कि बढ़ते हुए व्यापार घाटे को रोकने और निर्यात बढ़ाने की नई रणनीति के लिए हाल ही में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक निर्यात कार्यशील समूह का गठन किया है। यह समूह देश की निर्यात संवर्धन नीति, देश के मुक्त व्यापार समझौते और निर्यातकों के सामने आ रही विभिन्न चुनौतियों का अध्ययन करके निर्यात बढ़ाने की नई व्यापक रणनीति प्रस्तुत करेगा। यद्यपि चीन से पिछले वित्त वर्ष में व्यापार घाटे में कमी आई है, लेकिन इससे देश के बढ़ते हुए विदेश व्यापार घाटे के कम होने के मद्देनजर अधिक असर नहीं दिखा है।

गौरतलब है कि हाल ही में प्रकाशित भारत-चीन व्यापार के आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 88 अरब डालर रहा। यह बात महत्त्वपूर्ण है कि भारत पहली बार चीन के साथ व्यापार घाटा 10 अरब डालर तक कम करने में सफल रहा है। भारत का व्यापार घाटा करीब 52 अरब डालर रहा। इसमें कोई दोमत नहीं है कि इस समय देश के व्यापार घाटे के सामने एक बड़ी चुनौती अमरीका से भी उभरकर दिखाई दे रही है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत द्वारा अमरीकी वस्तुओं पर अन्यायपूर्ण तरीके से आयात शुल्क लगाए गए हैं। ऐसे में अमरीका भी भारत को विभिन्न प्रकार की निर्यात संबंधी रियायतों पर नियंत्रण लगाने के लिए आगे बढ़ा है।

अमरीका द्वारा 3 मई, 2019 को भारत को दी गई प्राथमिकताओं की सामान्यीकरण प्रणाली (जीएसपी) दर्जा समाप्त करने की निर्धारित अवधि समाप्त हो गई है। अब इस सुविधा को पूर्णतया समाप्त करने का आदेश अमरीका 23 मई के बाद कभी भी पारित कर सकता है। उल्लेखनीय है कि अमरीका से मिली व्यापार छूट के तहत भारत से किए जाने वाले करीब 5.6 अरब डालर यानी 40 हजार करोड़ रुपए के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगता है। अमरीका द्वारा भारत से आयात को दी जा रही तरजीही बंद करने से भारत से निर्यात किए जाने वाले कपड़े, रेडीमेड कपड़े, रेशमी कपड़े, प्रोसेस्ड फूड, फुटवियर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग उत्पाद, हेंड टूल्स, साइकिल के पुर्जों जैसी संबंधित औद्योगिक इकाइयों की मुश्किलें मुंहबाए खड़ी हैं। इन उद्योगों की मुश्किलें बढ़ने से इनमें कार्यरत हजारों लोगों के समक्ष नौकरियां जाने की चिंताएं भी खड़ी होंगी। यह सही है कि अमरीकी प्रशासन द्वारा कतिपय भारतीय वस्तुओं के किए जाने वाले निर्यात की प्राथमिकता को वापस लेने के बाद निर्यात क्षेत्र को वापसी करना और भी मुश्किल होगा। यह बात देश के अभियांत्रिकी निर्यात के लिए खास तौर पर सही है, क्योंकि उसे शून्य टैरिफ वाले देशों से तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। निश्चित रूप से निर्यात परिदृश्य पर दिखाई दे रही मुश्किलों को दूर करना होगा। भारतीय निर्यातकों के संगठन फियो का कहना है कि भारत के मुकाबले कई छोटे-छोटे देश मसलन बांग्लादेश, वियतनाम, थाईलैंड आदि ने अपने निर्यातकों को सुविधाओं का ढेर देकर भारतीय निर्यातकों के सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा खड़ी कर दी है। निर्यातकों को वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) में रिफंड संबंधी जो कठिनाई आ रही है, उसे दूर करना होगा। निर्यात को प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए और सभी निर्यातकों के लिए ब्याज सबसिडी बहाल की जानी चाहिए। सरकार द्वारा निर्यात वृद्धि के दीर्घकालिक प्रयासों के तहत निर्यात कारोबार का कमजोर बुनियादी ढांचा सुधारना होगा। खास तौर से समुद्री व्यापार से संबंधित बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान देना होगा। इसी तरह विभिन्न क्षेत्रीय कारोबारी समूहों और मुक्त व्यापार समझौतों के क्षेत्र में पूरा नियंत्रण हासिल करना होगा।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के कई पड़ोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान को भारत के निर्यात बढ़ने की संभावनाएं हैं। ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका में भी निर्यात बढ़ने की संभावना है। इसी तरह म्यांमार और मलेशिया सहित आसियान देशों को भी निर्यात बढ़ सकते हैं। इनके साथ-साथ कई विकसित देशों में भी भारत के निर्यात बढ़ने की संभावना दिखाई दे रही है। जरूरी है कि सरकार द्वारा अन्य देशों की गैर शुल्कीय बाधाएं, मुद्रा का उतार-चढ़ाव, सीमा शुल्क अधिकारियों से निपटने में मुश्किल और सेवा कर जैसे निर्यात को प्रभावित करने वाले कई मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। तुलनात्मक रूप से कम उपयोगी आयातों पर कुछ नियंत्रण करना होगा, वहीं निर्यात की नई संभावनाएं खोजनी होंगी।

यह भी महत्त्वपूर्ण है कि 10 मई को अमरीका और चीन के बीच व्यापार वार्ता टूट जाने तथा अमरीका द्वारा चीन के 200 अरब डालर मूल्य के उत्पादों पर 10 फीसदी की जगह 25 फीसदी आयात शुल्क लगाने के बाद अमरीका और चीन के बीच व्यापार युद्ध गहरा गया है। इस ट्रेड वार के बीच भारत से चीन को निर्यात बढ़ाने का जो नया परिदृश्य दिखाई दे रहा है, उसका भरपूर लाभ लेना होगा। चीन को निर्यात बढ़ाने के लिए हमें चीन के बाजार में भारतीय सामान की पैठ बढ़ाने के लिए उन क्षेत्रों को समझना होगा, जहां चीन को गुणवत्तापूर्ण भारतीय सामान की दरकार है। हम आशा करें कि हाल ही में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा व्यापार घाटा कम करने एवं निर्यात बढ़ाने के लिए जिस कार्यशील समूह का गठन किया गया है, वह समूह निर्यात की नई राह प्रशस्त करते हुए दिखाई देगा। इससे वर्ष 2020 तक निर्यात बाजार में तेजी से आगे बढ़ने और वैश्विक निर्यात में भारत का हिस्सा दो फीसदी तक पहुंचाने के लिए निर्यात की नई संभावनाओं को साकार किया जा सकेगा तथा निर्यात के नए बाजारों में दस्तक दी जा सकेगी। साथ ही साथ विदेशी व्यापार घाटे को कम किया जा सकेगा।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या कर्फ्यू में ताजा छूट से हिमाचल पटरी पर लौट आएगा?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz