शांति और संयम की दरकार

 डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर

ज्यों-ज्यों चुनाव का अंतिम पड़ाव नजदीक आ रहा है, बड़े-बड़े नेताओं का आपस में घटिया वाकयुद्ध बढ़ गया है। माना प्रधानमंत्री के लिए अभद्र भाषा प्रयोग में नहीं लानी चाहिए, परंतु यह भी कहां लिखा है कि जवाब में प्रधानमंत्री चिल्ला-चिल्ला कर विपक्ष पर वार करें। एक दोहा याद आता है – ‘क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात, कह शिव जी क्या घटी गयो, जो मृगु मारी लात’। क्यों अपनी चुनावी सभाओं में विपक्ष की गालियों का पराक्षेप कर रहे हैं? जैसा कि प्रधानमंत्री भी जानते हैं कि प्रियंका गांधी, मायावती, ममता बनर्जी सत्ता छिन जाने से छटपटा रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को इनकी गालियों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अतः शांत होकर देश की जनता और विकास से जुडे़ मुद्दों की बात करनी चाहिए।

 

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