शिमला के बंदरों को मारने दे सरकार

केंद्र को भेजा प्रस्ताव, उत्पातियों को वर्मिन घोषित किया जाए

 शिमला —राजधानी शिमला में खूंखार बंदरों को मारने के लिए प्रदेश सरकार ने फिर से अनुमति मांगी है। बीते दिनों प्रदेश की 93 तहसीलों में बंदरों को मारने की स्वीकृति मिल गई थी, लेकिन राजधानी शिमला को बाहर रखा गया। हालांकि इस संदर्भ में प्रदेश सरकार ने पहले भी प्रस्ताव भेजा था कि नगर निगम के दायरे में बंदरों का आतंक दूसरे क्षेत्रों से कहीं अधिक है और उन्हें वर्मिन घोषित किया जाए। बावजूद इसके वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार ने नगर निगम शिमला में बंदरों को मारने की अनुमति नहीं दी। इसे देखते हुए प्रदेश की जयराम सरकार ने फिर से केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। उल्लेखनीय है कि नगर निगम दायरे में खूंखार बंदरों को मारने के लिए वर्ष 2016 से लेकर दिसंबर, 2017 तक दो बार अनुमति दी थी, लेकिन इस दौरान पांच ही बंदर मारे गए।  जब तक वर्मिन घषित करने की अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक राजधानी में बंदरों की नसबंदी प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि नसबंदी की प्रक्रिया वर्ष 2006 से शुरू हुई थी। इसे देखते हुए वन विभाग की वाइल्ड लाइफ  विंग से इस साल भी नसबंदी का काम शुरू करने का निर्णय लिया है। पूरे प्रदेश में इस साल 20 हजार बदंरों की नसबंदी करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें शिमला शहर में कम से कम 5000 बंदरों की नसबंदी होनी है। जानकारी के मुताबिक पिछले साल शिमला में 1365 बंदरों की नसबंदी हुई। इसे देखते हुए वाइल्ड लाइफ  विंग ने शिमला में बंदरों की नसबंदी करने का निर्णय लिया है। शोघी से जाखू तक बंदरों का इतना आतंक है कि यहां आने वाले सैलानियों को भय के साए में घूमना पड़ता है। वन विभाग ने राजधानी शिमला में लोगों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए नौ मंकी वाचर्स तैनात किए थे। हैरानी इस बात की है कि इन मंकी वाचर्स ने एक भी बंदर नहीं मारा, जबकि लोगों की सुरक्षा के लिए ही नौ मंकी वाचर्स को ईको बटालियन कुफरी से शिमला में तैनाती दी गई थी।

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