श्रद्धाभाव से मिलते हैं भगवान

हरोली—ईश्वर की भक्ति में श्रद्धा सबसे बड़ा साधन है। इसे किसी भी प्रकार टूटने नहीं देना चाहिए। मुश्किल से मुश्किल घड़ी में प्रभु चरणों से हमारा विश्वास टूटे नहीं। कठिन घड़ी में हमें और अधिक सतर्क हो जाना चाहिए। हमारे धैर्य, श्रद्धा एवं विश्वास की परीक्षा विपरीत परिस्थितियों में ही होती है। जिसके जीवन में ईश्वरीय प्रेम है वह दुख के महासागर को भी सरलता से पार कर लेता है। श्रीराम कथा राष्ट्र कथा है। यह भावमय ज्ञानसूत्र श्रीराम कथा के समापन अवसर पर प्रवचन करते हुए परम श्रद्धेय कथावाचक अतुल कृष्ण महाराज ने शिव मंदिर बढेड़ा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा से हमारे दैनिक जीवन में कृतज्ञता, शिष्टता एवं विनम्रता का भाव उतरना ही चाहिए। प्रभु के चरणों का अनुराग उत्तम गुणों से भर देता है। जीव की प्रीति से रीझ कर अजन्मा परमात्मा हमारे बीच प्रकट होने के लिए विवश हो जाता है। वास्तव में हमें ऐसे ही भगवान की जरूरत है जो अपने स्नेहीजनों की चाह को स्वीकार कर उनके बीच अवतरित हो जावे। अपने भक्तों के बीच में लीला करें, क्रीडा करे, झूला झूले, होली खेले, हंसे, बोले एवं मुस्कराए। अतुल कृष्ण ने कहा कि श्रीराम कथा कलियुग के संतप्त जीवों के लिए कल्पवृक्ष की शीतल छाया है। भगवान का यह लीलामय चरित्र तन-मन को पवित्र करने वाली माधुर्यमय मंदाकिनी है। सन्मार्ग की प्राप्ति के लिए भगवान का आश्रय अति आवश्यक है।

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