संगड़ाह में चूना खदान को क्लीयरेंस

लाइम स्टोन माइन को वन मंत्रालय ने दिखाई हरी झंडी

 संगड़ाह -नागरिक उपमंडल संगड़ाह में करीब दो दशक से बंद पड़ी एक और चूना खदान को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एन्वायरनमेंट क्लीयरेंस मिलने के बाद उक्त खदान में खनन कार्य शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। संगड़ाह कस्बे से करीब तीन किलोमीटर दूर डिग्री कालेज के समीप मंडोली नामक स्थान पर 182 बीघा लीज क्षेत्र में मौजूद हिमालय लाइम स्टोन माइन के संचालक रविंद्र यादव तथा भू-स्वामियों के अनुसार संभवतः इसी माह उक्त माइन पर खनन कार्य शुरू किया जाएगा। इससे पूर्व गत 15 मार्च से संगड़ाह-नाहन मार्ग पर कस्बे से करीब इतनी ही दूरी पर स्थित 53 बीघा में मौजूद दुर्गा लाइम स्टोन माइन पर भी खनन कार्य शुरू हो चुका है। उपमंडल में पहले से चल रही संगड़ाह, भड़वाना, भूतमढ़ी व दुर्गा माइन के बाद शुरू होने वाली हिमालय माइन उपमंडल संगड़ाह की दूसरी सबसे बड़ी चूना खदान है, जो दो दशक पहले औपचारिकताएं पूरी न होने के चलते बंद हुई थी। क्षेत्र की 376 बीघा में मौजूद बड़ी भूतमढ़ी लाइम स्टोन माइन पहले से ही चल रही है। चूना खदानों पर पंजीकृत मजदूरों की संख्या हालांकि मात्र 35 के करीब है, मगर संबंधित खनन व्यवसायियों के अनुसार इन खदानों से 200 के करीब लोगों को परोक्ष रोजगार मिल रहा है। काफी अरसे से बंद पड़ी दुर्गा माइन को जहां लीज एरिया को पांच हेक्टेयर से कम किए जाने के बाद प्रदेश सरकार के वन विभाग से ही क्लीयरेंस मिल गई थी, वहीं हिमालय लाइम स्टोन माइन मंडोली को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। क्षेत्र में पर्यावरण जागरूकता संबंधी गतिविधियां आयोजित करने वाली स्वयंसेवी संस्था सारा के मुख्य सचिव बीएन शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पर्यावरण प्रेमी किंकरी देवी के निधन के बाद से क्षेत्र में अवैध व अवैज्ञानिक खनन फिर शुरू हो चुका है। संबंधित खनन अधिकारियों ने संगड़ाह के साथ लगती मंडोली माइन को पर्यावरण क्लीयरेंस मिलने की पुष्टि की है।

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