सजग साधना-सविनय सेवा बना कागजी लोगो

 नेरवा—सजग साधना-सविनय सेवा हिमाचल पथ परिवहन निगम का यह स्लोगन मात्र कागजी होकर रह गया है क्योंकि परिवहन निगम की बसों में तैनात कुछ बिगड़ैल चालकों-परिचालकों ने निगम के इस स्लोगन के मायने ही बदल कर रख दिए है। इन बिगड़ैल परिवहन कर्मियों की वजह से आए दिन न केवल बसों में सफर करने वाली सवारियों को परेशानी से दो चार होना पड़ता है बल्कि यह लोग देवभूमि की मर्यादा को ताक पर रख कर कथित रूप से पैसे लेने के बाद जलील करने में भी पीछे नहीं हटते। इन कथित बिगड़ैल कर्मचारियों की वजह से परिवहन निगम की साख पर भी बट्टा लग रहा है। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को नेरवा में भी प्रकाश में आया है। हुआ यूं कि नेरवा निवासी अनिल ने हरिद्वार-शिमला बस संख्या एचपी 63.4868 में विकासनगर से दस किलो पनीर मंगवाया था। नेरवा में उसने जब पनीर का डब्बा उतारा तो परिचालक प्रेम से इसके भाड़े के बारे  पूछा। बस के परिचालक प्रेम ने मात्र दस किलो डब्बे के भाड़े के रूप में साठ रुपए की मांग रखी। अनिल ने परिचालक को साठ रुपए देते हुए जब टिकट की मांग की तो परिचालक आग बबूला हो गया व कहने लगा कि वह दस किलो सामान का टिकट देने के लिए बाध्य नहीं है। यह पैसे तो वह डब्बे के संभालने के ले रहा है। अनिल ने जब कहा कि टिकट बनाना आप का कर्तव्य बनता है। लिहाजा मुझे साठ रुपए की टिकट बना कर दें। इस पर परिचालक प्रेम आग बबूला होकर बदतमीजी पर उतर गया व कहने लगा कि मैं टिकट नहीं बनाता तूने जो करना है कर ले। अनिल कुमार ने परिवहन निगम प्रबंधन से मांग की है कि परिचालक प्रेम द्वारा उसके साथ किये गए इस व्यवहार से उसकी प्रतिष्ठा आहत हुई है। अतः इसके लिए परिचालक के खिलाफ  कार्रवाई की जाए। इस विषय में कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक रतन शर्मा से बात करने पर उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। उधर क्षेत्रीय प्रबंधक तारादेवी सुनील सनाडि़या से बात करने पर उन्होंने कहा कि बसों में बिना व्यक्ति के किसी का सामान लाने पर निगम प्रबंधन द्वारा रोक लगाई गई है। इसके बावजूद यदि परिचालक ने सामान लाकर पैसे वसूलने के बाद किसी से बदसलूकी की है तो जांच कर परिचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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