सड़कों पर खर्च का हिसाब-किताब शुरू

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के ऑडिट को जांच टीम ने सचिवालय में लिए दस्तावेज

शिमला -हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत किए गए कार्यों पर खर्च हुए बजट का ऑडिट शुरू हो गया है। मंगलवार को इस संबंध में ऑडिट टीम ने सचिवालय से भी दस्तावेज लिए हैं। इसके साथ विभाग से कागजात जुटाए जा रहे हैं वहीं फील्ड में हुए कार्यों को भी जांचा-परखा जाएगा।बता दें कि केंद्र सरकार अपनी इस खत्म हो रही योजना का ऑडिट करवा रहा है। पिछले दो-तीन साल में इस योजना के तहत केंद्र से कितना पैसा आया और उसे किस तरह से खर्च किया गया है, फील्ड में सड़कों की स्थिति क्या है, इन सभी का आकलन किया जा रहा है। बता दें कि चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्रालय से प्रदेश सरकार को इस संबंध में पत्र आया था, जिसके बाद खर्च की गई धनराशि और उससे खड़े हुए स्ट्रक्चर को लेकर विस्तृत जानकारी लोक निर्माण विभाग ने केंद्र को भेजी थी। यह सूचना मिलने के बाद अब योजना का ऑडिट शुरू हो गया है। वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू हुई थी। हिमाचल को इस योजना में विशेष राज्यों की श्रेणी में रखा गया था। इसके तहत प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण व पुराने रोड को अपग्रेड करने के लिए केंद्र 90ः 10 में बजट देता है।  अब वित्तीय वर्ष 2017-18 से मिले बजट का ऑडिट किया जा रहा है। गौर हो कि इस वित्तीय वर्ष में हिमाचल को पीएमजीएसवाई के तहत 295 सड़कों के लिए 1002.82 करोड़ का बजट मंजूर किया गया था। इसमें से 229.53 करोड़ ही खर्च किया जा सकता था। केवल चार बस्तियों को ही सड़क सुविधा से जोड़ा जा सकता था, जबकि 271 बस्तियों को गांव से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। वित्तीय वर्ष 2018.19 में 158 सड़कों के निर्माण के लिए 620.09 करोड़ का बजट अपू्रव हुआ था। अभी इसका रिकार्ड मेंटेन किया जा रहा है कि कितना बजट खर्च किया है और कितनी बस्तियों तक सड़क पहुंची है।

19 साल में 5347.81 करोड़ बजट जारी

पीएमजीएसवाई के तहत हिमाचल को 19 सालों में 5347.81 करोड़ का बजट केंद्र ने जारी किया है। इसके तहत अभी तक 3094.17 करोड़ का बजट खर्च किया जा चुका है। अभी तक प्रदेश में इस योजना के तहत 5347.81 करोड़ का बजट मंजूर हुआ है। इसमें से 3094.17 का बजट खर्च किया जा चुका है। इसके तहत राज्य में 15060.191 किलोमीटर सड़कें बनना प्रस्तावित थीं और 11383.849 किलोमीटर का ही निर्माण हो पाया है। केंद्र्र ने दो चरणों में यह योजना चलाई जिसे अब बंद करके इसके प्रारूप को बदला जा रहा है।

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