सड़क के लिए चुनावों के बहिष्कार की धमकी

नेरवा—बौर पंचायत की सरकारी अनदेखी के चलते चुनाव बहिष्कार का निर्णय ले चुके लोग सड़क निर्माण में चल रहे विवाद में विधायक की मध्यस्थता और विभाग के पक्के आश्वासन के अलावा किसी भी सूरत अपना निर्णय बदलने को तैयार नहीं है। लिहाजा पंचायतवासियों की चुनाव बहिष्कार की घोषणा स्थानीय विधायक के गले की फांस बन चुकी है। लोगों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। बौर के लिए बनने वाली सड़क का निर्माण कार्य पंचायत के ही दो गुटों की आपसी खींचतान की वजह से लटका हुआ है। इस विषय में दिव्य हिमाचल ने बौर पंचायत के बाशिंदों नाग चंद, देइ सिंह, साधु राम, अमर सिंह, भगत राम, बंसी राम प्रेम सिंह, हरी चंद, दौलत राम, चेत राम, विक्रम व रत्न लाल से सरकार के प्रति उनकी नाराजगी जानने का प्रयास किया तो सभी का एक ही कहना था कि उन्हें पिछले सात सालों से आज तक आश्वासनों के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हो पाया है जिस वजह से वह सरकार व स्थानीय विधायक से नाराज है। इन लोगों का कहना है कि चौपाल के विधायक बलवीर सिंह वर्मा जब पहली बार 2012 विधान सभा चुनाव में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी बौर पंचायत में वोट मांगने आए थे तो उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह जब अगली बार बौर आएंगे तो गाड़ी में आएंगे लोगों का आरोप है कि विधायक दूसरी बार भी सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक बन चुके है परंतु इन सात सालों में विधायक से कोरे आश्वासनों के सिवा उन्हें कुछ भी नहीं मिला है जबकि विधायक दोनों पक्षों को बैठा कर व विभाग को आवश्यक निर्देश देकर इस मसले को हल का सकते थे। इन लोगों का कहना है कि यदि विधायक अभी भी दोनों पक्षों को आमने सामने बैठा कर व विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर इस विषय में मध्यस्थता कर सड़क के निर्माण का रास्ता साफ करने की पहल करें तो यह मसला हल हो सकता है परंतु विधायक इस मामले में कोई भी रूचि नहीं ले रहे हैं। बताते चलें कि उपमंडल चौपाल की दुर्गम, पिछड़ी और दूरस्थ पंचायत बौर के लिए बनने वाली इस सड़क के निर्माण की प्रक्रिया 35 साल पहले 1984 में शुरू हो चुकी है परन्तु कुछ लोगों के आपसी विवाद के कारण इसका निर्माण डाडल नमक स्थान पर जनवरी माह से रोक दिया गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्धारित ट्रैक के अनुसार यह सड़क पंचायत के मुहाने डोर से सुनारली, थुनाल्डी, कारोला से होते हुए बौर पहुंचनी थी परंतु कथित तौर पर पंचायत के ही एक प्रभावशाली गुट द्वारा अपने प्रभाव से इस सड़क का रुख डोर से डाडल की तरफ  करवा दिया गया। इसके बाद इस सड़क के निर्माण में विवाद शुरू हो गया क्योंकि लोक निर्माण विभाग निर्धारित किए गए ट्रैक से उपरोक्त गांव को सड़क सुविधा का लाभ मिलना था परंतु बाद में बदले गए ट्रैक के आधार पर उक्त चारों गांव सड़क सुविधा से वंचित हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि ट्रैक बदलने पर जहां से यह सड़क निकाली जा रही है उससे पंचायत के किसी भी गांव को कोई फायदा नहीं होगा व पंचायत वासियों को सड़क सुविधा नहीं मिल पाएगी। पंचायत वासियों का एक दर्दनाक पहलू यह है कि यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे पालकी से सड़क तक पंहुचाना पड़ता है जिसमें चार घंटे का समय लग जाता है। पूर्व में कई मरीज तो पालकियों में अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही दम तोड़ चुके हैं। स्थानीय निवासी बंसी राम व प्रेम सिंह ने बताया कि कुछ वर्ष पहले आईपीएच में कार्यरत पेट दर्द से जूझ रहे स्थानीय निवासी बीजा राम की पेट दर्द की वजह से व एक 24 वर्षीय युवक रमेश जोकि पैर फिसलने की वजह से घायल हो गया था उसकी मौत समय पर उपचार न मिल पाने की वजह से अस्पताल ले जाते रास्ते में ही हो गई थी। उल्लेखनीय है कि बौर पंचायत भाजपा बाहुल पंचायत है व प्रदेश में भाजपा सरकार की सत्ता के दौरान इस पंचायत के लोगों द्वारा चुनावों के बहिष्कार की घोषणा करना सरकार व चौपाल में सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं पर सवालिया निशान खड़े करता है। पंचायत के लोगों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 18 मई तक उन्हें कोई पक्का आश्वासन नहीं मिलता है तो वह 19 मई को होने वाले लोक सभा चुनाव का बहिष्कार तो करेंगे ही भविष्य में आंदोलन की राह भी अपनाने से गुरेज नहीं करेंगे।

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