समर फेस्टिवल के लिए बजट सबसे बड़ा चैलेंज

शिमला-हिल्सक्वीन शिमला में हर साल होने वाले समर फेस्टिवल का अस्तित्व बजट कम होने की वजह से खतरे में आ जाता है। साल दर साल समर फेस्टिवल में बड़े कलाकारों को बुलाने के लिए लाखों का बजट जिला प्रशासन देने में असमर्थ हो जाता है। इस वजह से काफी समय से देश व विदेशों से नामी कलाकार शिमला में इस महोत्सव को चार चांद लगाने के लिए नहीं पहंुच पाते हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार भी जिला प्रशासन को इतने कम समय में बजट का प्रबंध करना मुश्किल हो गया है। हालांकि कहा जा रहा है कि विभिन्न विभागों में प्रशासन ने बजट की मांग को लेकर प्रोपोजल भेज दिए हैं। वहीं, विज्ञापन भी जिला प्रशासन जल्द जारी करेगा। दरअसल लोकसभा चुनाव व आचार संहिता के चलते जिला प्रशासन भी फेस्टिवल को लेकर कोई भी अधिकारिक कार्य नहीं कर पाए। ऐसे में अब पांच दिन में लाखों करोड़ांे के बजट की व्यवस्था विभाग कैसे करेगा, यह देखना अहम होगा। बता दें कि इस बार जिला प्रशासन ने बाहरी देशों से कलाकारों को बुलाने का दावा किया है। एक व दो दिनों में प्रशासन स्टार कलाकारों के नाम भी फाइनल कर देंगे। ऐसे में यह तस्वीर भी साफ हो जाएगी कि विदेशों से आने वाले कलाकार कितना बजट जिला प्रशासन से शिमला आने के लिए मांगते हैं। उल्लेखनीय है कि शिमला का अंतरराष्ट्रीय समर फेस्टिवल जब शुरू हुआ था, तो पहली जून से पांच जून तक शिमला में बहुत रौनक लगी रहती थी। इस दौरान शिमला में बालीवुड स्टार के आने से भी शिमला का महत्व और बढ़ जाता था। समर फेस्टिवल को दूर-दूर से पर्यटक पहुंचते थे, लेकिन अब पर्यटकों की संख्या भी कम हो गई है। वहीं, समर फेस्टिवल का अस्तित्व भी खत्म होता जा रहा है। बता दें कि जिला प्रशासन ने बजट कम होने की वजह से इस बार ग्रीष्मोत्सव की चार ही नाइटें की हैं। वहीं वर्ष 2018 में भी केवल तीन दिन ही दिन समर फेस्टिवल आयोजित किया गया था। जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष 60 लाख बजट तीन दिन के समर फेस्टिवल में हुआ था। बता दें कि पिछली बार भी बाहरी राज्यों से कोई बड़े कलाकार नहीं आए थे। वहीं, इस बार तो शिमला के नए डीसी राजेश्वर गोयल यह कह चुके हैं कि वह इस बार के अंतरराष्ट्रीय समर फेस्टिवल की खोई रोनक को लाने का पूरा प्रयास करेंगे। बता दें कि इस अंतरराष्ट्रीय समर फेस्टिवल में आने वाले कलाकारों के नाम 30 मई को फाइनल हो जाएंगे। गौर रहे कि वर्ष 2018 में भी पानी के संकट की वजह से समर फेस्टिवल को जिला प्रशासन ने सितंबर में आयोजित किया था। उस दौरान भी ग्रीष्मोत्सव को लेकर कई सवाल जिला प्रशासन पर लोगों द्वारा उठाए गए थे। अब इस बार समय पर हो रहे इस महोत्सव में पर्यटकों व स्थानीय लोगों को क्या नया मिल पाता है, यह देखना अहम रहेगा। इस दौरान यह भी अहम रहेगा कि जिला प्रशासन को समर फेस्टिवल को चार चांद लगाने के लिए सरकारी विभागों से कितनी आर्थिक सहायता मिलती है।

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