समाज सुधार की माध्यम हैं राजेश की कहानियां

May 12th, 2019 12:05 am

मेरी किताब के अंश :

सीधे लेखक से

किस्त : 15

ऐसे समय में जबकि अखबारों में साहित्य के दर्शन सिमटते जा रहे हैं, ‘दिव्य हिमाचल’ ने साहित्यिक सरोकार के लिए एक नई सीरीज शुरू की है। लेखक क्यों रचना करता है, उसकी मूल भावना क्या रहती है, संवेदना की गागर में उसका सागर क्या है, साहित्य में उसका योगदान तथा अनुभव क्या हैं, इन्हीं विषयों पर राय व्यक्त करते लेखक से रू-ब-रू होने का मौका यह सीरीज उपलब्ध करवाएगी। सीरीज की १5वीं किस्त में पेश है कहानीकार राजेश कुमार कोतवाल का लेखकीय संसार…

कहानी संग्रह ‘नन्ही सी नाव’ के लेखक राजेश कुमार कोतवाल का कहना है कि मेरा जन्म हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की जोगिंद्रनगर तहसील के गांव ऐहजू में साधारण किसान परिवार में हुआ। आरंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में ही हुई। जमा दो की परीक्षा वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौंतड़ा से प्राप्त की। कालेज की शिक्षा मैंने गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कालेज बैजनाथ में सन् 1990 में प्राप्त की, जहां कि मेरे अधिकतर प्रवक्ता स्वयं में अच्छे साहित्यकार थे, जिनमें श्रीमती सरोज व्यास, डाक्टर सुमन सच्चर, श्री विजय विशाल आदि मेरे प्रेरणा स्रोत थे। जब मैंने लिखना प्रारंभ किया तो मेरी रचनाओं को कालेज की पत्रिका ‘सनातनधारा बिनवा’ में काफी स्थान मिला। बचपन से ही अच्छा साहित्य पढ़ना मुझे अच्छा लगता है। स्कूल के समय पढ़ी गई अच्छी कहानियां मुझे आज भी याद हैं। मेरे घर में मेरे चाचा श्री रतन चंद कोतवाल ने भी मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मुझे कवि सम्मेलनों में जाना सिखाया। इस दिशा में आगे बढ़ने में डाक्टर पीसी कौंडल, श्री प्रकाश चंद धीमान आदि साहित्यकारों का सराहनीय योगदान मिला। जब मैंने स्व. श्री प्रेम भारद्वाज, डाक्टर कांता शर्मा, श्री सुरेश सेन निशांत आदि कवियों के साथ मंच पर कविताएं पढ़ी, वह दिन मेरे अच्छे दिनों में शुमार हैं। मूलतः मैं कहानीकार हूं। कहानी समाज का आईना होती है। समाज की विविधता ही कहानियों की विविधता का कारण है। जितना संपन्न समाज होगा, उसका साहित्य भी उतना ही संपन्न होता है। कहानी समाज सुधार का भी सशक्त माध्यम होती है। अभी तक मेरी दो किताबें छप चुकी हैं, जिनमें से एक कहानी संग्रह ‘नन्ही सी नाव’ नाम से वर्ष 2007 में प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में कुल सत्रह कहानियां हैं। संग्रह की पहली कहानी का शीर्षक है ‘अपंग’। अपंग कहानी उस दौर में लिखी गई है जब इस वर्ग के लिए दिव्यांग शब्द का प्रयोग प्रचलन में नहीं आया था। कहानी एक बीस वर्षीय युवा के अंतर्द्वंद्व, संघर्ष एवं भावनाओं की  अभिव्यक्ति है। युवावस्था में उठने वाली भावनाओं का चित्रण इस कहानी में बड़े सुंदर ढंग से किया गया है। संग्रह की अगली कहानी ‘घर वापसी’ पिछली कहानी के पात्र राजू के पिता जालिम सिंह के जीवन चरित्र पर गढ़ी गई है। जिस दौर में यह कहानी लिखी गई थी, उस समय नौकरी करना खेतीबाड़ी करने से निम्न काम माना जाता था। इस वजह से जालिम सिंह की मां उसके नौकरी के पत्र को छुपा देती है तथा उसे जमीन-जायदाद संभालने की सलाह देती है, परंतु वक्त के बदलने पर उसे मजबूरी में चाय की दुकान करनी पड़ती है। संयोग से जालिम सिंह की शादी एक सुशील, संस्कारी लड़की सीता से हो जाती है। सीता के आने से जालिम सिंह के घर में काफी बरकत आ जाती है, परंतु जालिम सिंह की शराब की लत के कारण सीता पर काफी अत्याचार होते हैं। जालिम सिंह की माता उसके कान भरकर अपने सास होने का परिचय देती है। ऐसे समय में सरोज नामक औरत जालिम सिंह के निकट आने की कोशिश करती है, परंतु उसकी सच्चाई जानते ही जालिम सिंह की घर वापसी होती है। संग्रह की अगली कहानी ‘नन्ही सी नाव’ कन्या भ्रूण हत्या विषय पर एक नवजात बच्ची को नाले में फेंकने से लेकर उसे एक नवयुवक द्वारा गोद लेने के संघर्ष की कहानी है। नवजात बच्ची एक नाव की तरह इधर से उधर भटकने के बाद किनारा प्राप्त कर लेती है। संग्रह की अगली कहानी तमिलनाडु से हिमाचल घूमने आए एक बाबा की कहानी है जो कि सामाजिक जिंदगी से पलायन करके बाबा तो बन जाता है, परंतु अपनी बुरी आदतों, मांस-मदिरा का सेवन, फिल्में देखना आदि का त्याग नहीं कर पाता। कहानी के अंत में उसे अपने सामाजिक जीवन में अपने घर लौटना ही पड़ता है। संग्रह की अगली कहानी ‘दीवार’ सास-बहू के टकराव एवं दहेज प्रताड़ना पर बुनी हुई कहानी है। कल्पना एक पढ़ी-लिखी युवती होने के बावजूद अपने पिता के दिए संस्कारों के कारण दहेज प्रताड़ना को चुपचाप सहन कर जाती है। कल्पना की सास द्वारा अपने लड़के के घर को अनजाने में बर्बाद करने की पूरी कोशिश करने के बावजूद कल्पना की सहनशक्ति की ही जीत होती है। संग्रह की सातवीं कहानी ‘तबादला’ एक लिपिक वर्गीय कर्मचारी द्वारा अपने स्थानांतरण के लिए किए जाने वाले संघर्ष की कहानी है। संग्रह की आठवीं कहानी ‘मिरग’ है। कहानी का यह शीर्षक तेंदुए के लिए स्थानीय भाषा के शब्द का प्रयोग कहानी को आंचलिक और आकर्षक बनाता है। कहानी मानव और जंगली जानवर के टकराव को बखूबी बयान करती है। संग्रह की नौवीं कहानी ‘जंगल की आग’ के माध्यम से लेखक ने जनता और रूढि़वादी मुखिया में टकराव को दर्शाया है। जब लोग जंगल में लगी आग से घबरा कर प्रधान से मदद मांगने जाते हैं तो प्रधान कहता है कि यह काम जंगलात महकमे का है, जो कि काफी दुखद लगता है। सत्ता के मद में प्रधान के लड़के द्वारा गार्ड की पिटाई कर दी जाती है। संग्रह की ग्यारहवीं कहानी गाय को दहेज में देने के पावन रिवाज से आरंभ होकर गाय की वर्तमान दुर्दशा पर अंत होती है। संग्रह की बारहवीं कहानी ‘दाग’ है। कहानी की शुरुआत दुलिया नामक लड़के पर उसकी सौतेली मां के अत्याचारों से होती है। अगली कहानी ‘सपने और सच्चाई’ सपनों में जीने वाली एक युवती के जीवन की कहानी है, जिसे हकीकत की दुनियां से सामंजस्य बिठाने में सारी जिंदगी लग जाती है, परंतु तब तक बहुत देर हो जाती है। पानी का बुलबुला नामक कहानी अमर नामक युवक के छोटे से सुंदर जीवन वृत्त पर आधारित है। समय की भूल नामक कहानी का पात्र विजय बेरोजगारी का शिकार युवक है, जो चाय की दुकान खोलकर बेरोजगारी से लड़ता है। ‘निन्यानवे का फेर’ नामक कहानी पैसों से भरे हुए एक घड़े के साथ-साथ आगे बढ़ती है। मेरी कहानियां समय-समय पर पंजाब केसरी, दिव्य हिमाचल आदि समाचार पत्रों में छप चुकी हैं। इसके अतिरिक्त मेरी रचनाएं हिमखंड पत्रिका मंडी, गिरिराज शिमला, हिमदिशा एवं शब्द मंच बिलासपुर, साहित्य सरोवर कर्नाटक आदि में स्थान पाती रही हैं। मुझे समय-समय पर अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है, जिनमें ‘हिरदे कवि रत्न सम्मान’ महिमा प्रकाशन छत्तीसगढ़ द्वारा, ‘साहित्य रत्न सम्मान’ साहित्य सरोवर र्नाटक द्वारा, ‘काव्य मर्मज्ञ सम्मान’ इंद्रधनुष बिजनौर (यूपी) द्वारा, ‘न्यू-रितम्भरा सद्भावना साहित्य सम्मान’ छत्तीसगढ़ द्वारा, ‘श्रेष्ठ साहित्य सम्मान’ हिमखंड मंडी हिमाचल प्रदेश द्वारा, ‘नीला आसमान साहित्य सम्मान’ हिमखंड मंडी द्वारा, प्रशस्ति पत्र लघुकथा ‘असली घर’ के लिए, श्रेष्ठ साहित्य सम्मान ‘आज के हालात’ के लिए व ‘अमर कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला स्मृति सम्मान’ पठानकोट से, जैसे पुरस्कार शामिल हैं। भविष्य में साहित्य की और भी सेवा कर सकूं, यही मेरी कामना है। जिन लोगों का सहयोग मेरी साहित्य यात्रा में मिला है, उन सबका दिल की गहराइयों से आभारी हूं।

(सीरीज में कोई भी लेखक खुद अपनी किताब का विवेचन कर सकता है। यहां दिए मोबाइल नंबर्स पर संपर्क करें।)

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