सम्मान देने आ गए… बुढ़ापा पेंशन कहा है

नगरोटा बंगवा—चुनाव आते ही शासन और प्रशासन अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने को तो जी जान से जुट गया है, इसके लिए शतायु पार कर चुके बुजुर्ग लोगों को लोकतंत्र का प्रकाश स्तंभ का दर्जा देकर खूब मान-सम्मान उंडेला जा रहा है। अधिकारी घर-द्वार पर मत के लिए खास न्योता देने भी जा रहे हैं तथा व्यवस्थाएं भी जुटाई जा रही हैं। लेकिन लोकतंत्र के यही प्रकाश स्तंभ किस तरह से अपना गुजर-बसर कर रहे हैं इससे पहले यह जानने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। यही समाज के आधार स्तंभ और लोकतंत्र के प्रकाश स्तंभ  बिगड़ी शासकीय व्यवस्था के चलते जिंदगी के बोझ को अपने कमजोर कंधों पर किस तरह ढो रहे हैं इसकी पड़ताल जब ‘दिव्य हिमाचल’ ने की तो यह कड़वा सच सामने आया जो हमारी व्यवस्था की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। ‘दिव्य हिमाचल’ जब नगरोटा बगवां की ग्राम पंचायत मझेटली की 104 वर्षीय बुजुर्ग महिला मतदाता टिहरी देवी से रू-ब-रू हुआ तो जाना कि उक्त महिला अनुसूचित जाति से संबंधित है तथा दशकों से लाचार विधवा का जीवन जी रही है। कहने को तो टिहरी देवी का अच्छा खासा परिवार है तथा पड़पोतों-पड़पोतियों सहित कुल 11 आदमी घर पर मौजूद हैं जो बुजुर्ग की सेवा में पूरी ईमानदारी से समर्पित हैं। मेहनत मजदूरी कर जीवन की गाड़ी को धकेल रहे परिवार में कोई भी सरकारी या गैर सरकारी मुलाजिम नहीं। लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान हेतु पूरी तरह सजग परिवार को मलाल यह है कि इस दौर में जब प्रशासन टिहरी देवी को बुजुर्ग और विधवा के रूप में स्वीकार कर रहा है तो आज तक उसके हिस्से की विधवा और बुढ़ापा पेंशन कहां, पिछले कुछ महीनों से सरकार की ओर से उसे मिलने वाले राशन पर रोक क्यों, उनका परिवार आज की तारीख में सरकार की अंत्योदय अथवा बीपीएल जैसी योजनाओं से बाहर क्यों, परिजनों का कहना है कि उक्त योजनाओं से अपने हिस्से का लाभ लेने वे हर चौखट पर नाक रगड़ चुके हैं लेकिन नतीजा बेअसर ही रहा।  सरकार जी, वोट तो अम्मां  हर परिस्थिति में डालेगी ही, लेकिन क्या सरकार उसे बची-खुची जिंदगी सम्मानजनक रूप से जीने का हक कब देगी, परिजनों के इस जायज सवाल पर प्रशासन क्या संज्ञान लेता है यह देखना बाकी है। इस बाबत जब उपमंडलीय अधिकारी अंकुश शर्मा से बात की गई तो उन्होंने परिजनों की मांग को जायज ठहराया तथा पेंशन तथा राशन आदि मुद्दों को सुलझाने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को 23 मई के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात कही।

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