साहित्य को देखने की फुरसत किसे

पिछले कुछ वर्षों से मैं शिमला के स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालयों में आयोजित होने वाले निबंध लेखन, नारा लेखन या फिर वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में निर्णायक के तौर पर जाती रही हूं। इस दौरान मुझे यह लगा कि लगभग सभी प्रतियोगिताओं में बच्चे इंटरनेट से ली गई विषय वस्तुओं पर निर्भर रहते हैं। नतीजा यह होता है कि छात्रों के प्रस्तुतिकरण में एक आडंबर सा दिखता है क्योंकि इन सब की सूचनाओं का स्रोत गूगल होता है। ऐसे में कई बार तो विषय-वस्तु एक समान होती हैं। यह परिस्थिति छात्रों, अभिभावकों और बच्चों के लिए शर्मनाक साबित हो जाती है। ये वही छात्र, अध्यापक और अभिभावक हैं जो अपने बच्चों के हाथों में चार इंच का स्क्रीन थमा कर यह समझते हैं कि हमने अपने बच्चों को पूरी दुनिया का ज्ञान उनकी हथेली पर रख दिया है। प्रायः यह तर्क दिया जाता है कि बच्चे इंटरनेट पर या फिर मास्टर क्लासिज के जरिए विषय को बेहतर समझते हैं। परंतु पुस्तकों के शब्दों के जरिए यह कर पाना संभव नहीं है। मैं यहां यह कहना चाहूंगी कि पुस्तकों का भी उतना ही महत्त्व है। बच्चों की रचनात्मकता को बनाए रखने में पुस्तकें ही महत्त्वपूर्ण हैं। जब सब कुछ हम बच्चों के सामने यूं ही प्रस्तुत कर देंगे तो उनकी रचनात्मकता कभी विकसित ही नहीं हो पाएगी।

नतीजतन हम तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को तो बना पा रहे हैं, किंतु संवेदनशील एवं रचनात्मक विनम्र युवाओं के लिए माहौल नहीं बना रहे हैं। वैसे भी पुस्तकों की विश्वसनीयता और हाथ में लेकर उन्हें पढ़ने का आनंद ही अनूठा है। डिजिटल स्क्रीन की तरह यह आपकी आंखों को थकाएगी नहीं, बल्कि सुकून देंगी और आपके व्यक्तित्व को विशिष्टता एवं ठहराव देंगी। हर चीज को करने की जल्दी आपमें नहीं होगी जैसा कि डिजिटलाइजेशन के दौर में हो रहा है। साहित्य समाज का आईना है और आज इस आईने को देखने की फुरसत किसे है? शिमला में पिछले पांच वर्षों से पुस्तक मेले का आयोजन हो रहा है। कितने अध्यापक, छात्र और अभिभावक हैं जिन्हें यह पता है या फिर इस पुस्तक मेले में आकर जिन्होंने अपने बच्चों को कोई कविता या कहानी की पुस्तक खरीदी हो। और आप सभी भी अपने आप से पूछें कि पिछले एक वर्ष के दौरान आपने कौन सी कहानी या उपन्यास पढ़ा है। और अपने बच्चे और पोते-पोतियों को सुनाने के लिए आपके पास कितनी कहानियों का भंडार है। शिमला में आयोजित पुस्तक मेला हम सब के लिए सुनहरा अवसर है कि जो पुस्तकें बड़े शहरों के पुस्तक मेलों में ही उपलब्ध होती हैं, वे पुस्तकें हमें शिमला में ही कम कीमत पर मिलेंगी। कई बड़े पब्लिशर्ज से सीधे हम पुस्तकें खरीद सकते हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण बात, साहित्य अकादमी और बुकर पुरस्कार से सम्मानित पुस्तकें इस पुस्तक मेले के दौरान आराम से मिल जाती हैं। प्रदेश सरकार को स्कूल, कालेज और विवि के छात्रों को शिमला पुस्तक मेले में शामिल होने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

 

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