सीएम खट्टर का सेमीफाइनल

लोकसभा इलेक्शन के परिणामों से साफ होगी विधानसभा की स्थिति

चंडीगढ़ -हरियाणा में रविवार को लोकसभा की सभी दस सीटों पर मतदान हुआ। इन चुनाव परिणामों का प्रभाव प्रदेश की विधानसभा चुनावों पर भी देखने को मिलेगा। इस साल अक्टूबर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार के पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है। 2014 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 47 सीटों पर जीत दर्ज किया था और अपने दम पर सत्ता की कुर्सी पर बैठी थी। इस बार भी बीजेपी के लिए मौके अधिक हैं और इसका कारण है विपक्षी एकता में कमी। कांग्रेस जहां अंदरुनी कलह से ग्रस्त है, तो वहीं इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) चौटाला परिवार में दरार के बाद से ही अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। आईएनएलडी को 2014 के चुनावों में दो सीटें मिली थीं। हालांकि अलग होकर जननायक जनता पार्टी (जेपीपी) बनाने वाले दुष्यंत चौटाला इस बार आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय सोनीपत से चुनावी मैदान में हैं। वहीं फरीदाबाद से नवीन जयहिंद को टिकट मिला है।

नए चेहरों को आम चुनावों में अहमियत

2014 के चुनाव में 34 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सात सीटें जीतने वाली बीजेपी इस बार भी पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर ही कैम्पेनिंग कर रही है। ध्रुवीकरण, 2016 जाट आरक्षण के मुद्दे पर हुई हिंसा, विकास के मुद्दे और किसान अन्य महत्त्वपूर्ण फैक्टर हैं। इस बार के चुनाव में बीजेपी नए चेहरों के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश में है। पार्टी ने कुरुक्षेत्र से नायब सैनी, करनाल से संजय भाटिया, रोहतक से अरविंद शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा गया है। बीजेपी जाट और गैर जाट के बीच विभाजन से फायदा उठाने की तैयारी में है।

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