सूचना का अधिकार 13 हजार में

रामपुर बुशहर—गरीब आदमी के हाथों से सूचना का अधिकार छिटकता जा रहा है। अगर सूचना लेनी है तो आपको अच्छी खासी रकम देने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। ऐसा ही वाक्या रामपुर में एक महिला के साथ हुआ है। उन्होंने नगर परिषद से अवैध कब्जा की लिस्ट और उन पर नगर परिषद द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में सूचना मांगी गई थी। सूचना का अधिकार के तहत किसी भी सूचना लेने वाले को एक माह के भीतर सूचना देनी होती है। ऐसे में एक माह के बाद जब उक्त महिला आश्वस्त थी कि उसे अब अवैध कब्जों की स्टीक जानकारी मिल जाएगी। लेकिन सूचना तो दूर उक्त महिला को 1295 पेज देने की सूरत में 12 हजार 950 रुपए जमा करने के आदेश जारी कर दिए गए। जिसके बाद ही उन्हें सूचना दी जाएगी। ऐसे में महिला हैरान है कि सूचना के अधिकार पर गरीब आदमी इस सुविधा से दूर जा रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक रामपुर वार्ड नंबर दो निवासी सुषमा मखैक ने नगर परिषद प्रबंधन से एक माह पहले सूचना मांगी थी कि रामपुर के समस्त नौ वार्डों में कितने अवैध कब्जे है और कितनों पर नगर परिषद ने कारवाई की और कितनों को नोटिस थमाए। इस पर नगर परिषद ने उक्त महिला को बिल थमा दिया। अगर सूचना के अधिकार एक्ट पर गौर करें तो उसमें साफ लिखा गया है कि अगर कोई सूचना मांगता है तो उसे एक माह के भीतर सूचना दी जाए। साथ ही उसमें ये अंकित है कि चार व तीन पेज में अगर सूचना दी जाती है तो प्रार्थी से प्रति पेज दो रुपए की वसूली की जाएगी। लेकिन यहां पर एक पेज के सीधे दस रुपए लिए जा रहे है। जो न्यायसंगत नहीं है। प्रार्थी ने इस बात को स्थानीय प्रशासन व नगर परिषद प्रबंधन के अधिकारियों के समक्ष उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह होता रहा तो सूचना का अधिकार पाने के लिए कोई भी गरीब व्यक्ति आगे नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि नगर परिषद द्वारा जो पत्र उन्हें दिया गया है उसमें साफ है कि 1295 पेज पर 12 हजार 950 रुपए लिए जा रहे है। अगर अतिरिक्त फीस ली जाती तो उक्त पत्र में अंकित होता। वहीं पेज अगर ए4 साईज से बड़े होते तो वह भी पत्र में अंकित होता। ऐसे में साफ है कि नगर परिषद प्रबंधन इस अवैध कब्जों वाली सूचना को देना नहीं चाहता। या फिर अपनी कार्यप्रणाली को सार्वजनिक नहीं करना चाहता कि कितने अवैध कब्जा धारकों पर उन्होंने कारवाई की।

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