सेब पौधों के पत्ते-टहनियां सूखीं

थुनाग—सराज के किसानों और बागबानों की फसल को नुकसान पहुंचाने में आन पड़ी विपदा कम होने का नाम नहीं ले रही है। इन दिनों सराज के चिऊणी में बागबानों के सेब के बागीचों में लगे पौधे ही बीमारी की चपेट में आ गए हैं, जिससे बागबान चिंतित हैं। बागबानों का कहना है कि उनके सेब के बागीचों में पौधों के पत्ते और टहनियां सूख रही हैं। बागबानों की बढ़ती चिंता को देखकर स्थानीय पंचायत ने पौधों में पसरी बीमारी की रोकथाम के लिए डीसी मंडी को एक प्रस्ताव पारित कर प्रेषित किया है, ताकि क्षेत्र के बागबानों को समय रहते कुछ राहत मिल सके। अभी सराज घाटी के चिऊणी के कई भागों में इस रोग के लक्षण पाए गए हैं। बागबानी विशेषज्ञ के मुताबिक सर्दियों में अधिक बर्फबारी के कारण कैंकर रोग सेब की फसल को अपनी जकड़ में ले लेता है। वहीं जाड़े के बाद बगीचों में कैंकर रोग पनपने का खतरा रहता है। सेब के साथ यह रोग नाशपाती के पेड़ों को भी जकड़ लेता है, मगर पौधों में उत्पन्न होने वाली बीमारी कोई भी हो बागीचों को उजड़ते देख बागबान खासे चिंतित हैं। पहले फ्लावरिंग के समय मौसम के अनुकूल न रहने तथा बाद में ओलावृष्टि के कारण सेब की फसल को हुए नुकसान के कारण बागबानों की परेशानी बढ़ गई है। बागबानों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल को हुए नुकसान के बाद इस वर्ष साल भर का खर्चा चलाने के समस्या खड़ी हो गई है। बागबानों का कहना है कि नए पौधों की तुलना में पुराने पेड़ों पर इस बीमारी का प्रकोप अधिक नजर आ रहा है। इन दिनों बागबान अपने बागीचों को संवारने में जुटे हैं। कई तरह के फफूंद से फैलने वाला यह रोग सेब के बागीचों में पांव पसार रहा है। इस बारे में बागबानी विषयवाद विशेषज्ञ टीआर चौहान ने कहा कि मामला ध्यान में आया है। विभाग मौके पर जाने के उपरांत समस्या को एग्जामिन करेगा।

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