सोशल मीडिया ने छीन ली भोंपू की आवाज

चुनावों से पहले इस बार सुनाई नहीं दे रहा लाउड स्पीकर से प्रचार

धर्मशाला    – पिछले विधानसभा चुनावों तक सुनाई देने वाली लाउड स्पीकर की आवाज लोकसभा चुनावों में गायब हो गई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब वाहनों में लाउड स्पीकर लगाकर कोई राजनीतिक दल अपना प्रचार नहीं कर रहा है। इससे पहले की बात करें तो सुबह से देर शाम तक वाहनों में भोंपू लगाकर खूब प्रचार किया जाता था। नेताओं के नाम पर आधारित बनाए गाने भी इन स्पीकरों पर ख्ूब बजते हुए सुनाई देते थे। माना जा रहा है कि हर हाथ में मोबाइल आ जाने से अब प्रचार सोशल मीडिया पर आधारित हो गया है। इससे प्रचार के कई पुराने माध्यम गायब ही हो गए हैं। लोग ध्वनि प्रदूषण अधिक न होने से खुश तो हैं, लेकिन कह रहे हैं कि उसके बिना भी चुनाव अधूरा सा लग रहा है। ऐसा लगता नहीं कि चुनाव हो रहे हैं। हालांकि कहीं इक्का-दुका आवाजें सुनाई भी दे रही हैं।  उधर, प्रशासन के पास भी वाहनों में लाउड स्पीकर की अनुमति लेने के लिए चुनिंदा लोग ही पहुंच रहे हैं।  मात्र जनसभाओं के लिए ही अनुमति ली जा रही है। पहले लाउड स्पीकर पर प्रचार जब शुरू होता था, तो पता चलता था कि कौन नेता कब और कहां आ रहा है, पर इस बार ऐसा नहीं है।

गांवों में बुजुर्गों को आ रही पुरानी यादें 

ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों जब सुबह शाम चौराहों, दुकानों व टियालों पर चुनावी चर्चा चलती है, तो लोग कहते हैं कि इस बार इलेक्शन का कोई शोर नहीं है। राजनीतिक दलों के लोग अपने अपने वर्कर्ज के साथ बैठकें कर चुपचाप लौट जा रहे हैं, जबकि पूर्व में ऐसा नहीं होता था। जब लाउड स्पीकर से प्रचार होता था, तो लोग उसकी आवाज सुनकर ही चुनावी रंग में रंग जाते थे। हालांकि युवा पीढ़ी को अब तो मोबाइल पर ही हर सूचना मिल जाती है।

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