स्कूलों की मोहलत पर फंस गए खुल्लर

हरियाणा निजी विद्यालय मामले में विवादित बयान देने पर सरकार के प्रधान सचिव के खिलाफ कोर्ट में शिकायत

चंडीगढ़ – हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर आदर्श आचार संहिता के दौरान विवादित बयान देकर उल्लंघना में फंस गए हैं। दरअसल प्रधान सचिव खुल्लर ने गत 10 मई को चंडीगढ़ से मीडिया में यह बयान देकर घोषणा की थी कि प्रदेशभर में चल रहे 3200 निजी स्कूलों को हरियाणा सरकार चुनाव के बाद एक साल की मोहल्लत देने का ऐलान कर देगी। इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त व पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को दी है। बृजपाल परमार ने अपनी शिकायत में यह भी हवाला दिया है कि 20 जुलाई 2019 मुख्यमंत्री मनोहरलाल की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों की एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें फैसला लिया गया था कि शिक्षा सत्र 2019-20 में स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों को छोड़कर बाकी सभी अस्थायी व गैर मान्यता (एग्जिसटिंग सूची) में शामिल स्कूलों को नियमों पर खरे नहीं उतरने पर बंद कराया जाएगा, क्योंकि ये सभी स्कूल शिक्षा नियमावली 1995, 2003 व 2009 में किसी भी नियम को पूरा नहीं करते हैं, क्योंकि इन स्कूलों के पास फायर व अन्य किसी भी विभाग से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र तक नहीं लिया हुआ है।  बृजपाल परमार ने बताया कि गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूल वर्षों बाद भी अपने नियम पूरे नहीं कर पाए, इस पर न्यायालय द्वारा भी कड़ी टिप्पणी करते हुए शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास को भी व्यक्तिगत तौर पर न्यायालय में तलब किया हुआ है, जिसकी सुनवाई 24 मई को होनी निर्धारित है। ऐसे में आदर्श आचार संहिता के दौरान प्रधान सचिव राजेश खुल्लर द्वारा इस तरह का बयान देकर सरकार को फायदा पहुंचाने व मतदान को प्रभावित करने का कुप्रयास किया गया है, जिस मामले में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराए जाने के साथ साथ विभागीय कार्रवाई की भी मांग की है।

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