स्कूलों में जर्मन लैंग्वेज को दिया जाए बढ़ावा

शिमला-हिमाचल प्रदेश के स्कूली छात्र डिजिटल मीडिया का प्रयोग अपनी स्टडी में कर सकते हैं। बशर्ते टीचर व अभिभावकों को ऑनलाइन पढ़ाई के रोचक तरीके छात्रों को बताने होंगे। यह बात सोमवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान जर्मन लैंग्वेज टीचर ऐसोसिएशन इंडिया के अध्यक्ष लक्ष्मी सेकर कालेपुर ने कही। उन्होंने बताया कि आज ज्यादातर छात्र जो अपने करियर में सफल नहीं हो पाते, उसका सबसे बड़ा कारण यही रहता है कि उनकी कॉम्युनिकेशन स्किल बेहतर नहीं हो पाती। इस वजह से वे विदेशों में भी नौकरी में बेहतर पद हासिल नहीं कर पाते। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर राजधानी सहित प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में जर्मनी लैंग्वेज को बढ़ावा दिया जाए, तो हिमाचल के छात्रों की स्किल इंप्रूवमेंट आसानी से हो पाएगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आज की युवा पीढ़ी ऑनलाइन गेम खेलकर समय बर्बाद करती है, अगर वह गेम की जगह अपने नोट्स ऑनलाइन तैयार करें और एक ऐप डाउनलोड कर प्रतियोगी परीक्षाओं के सवालों को सॉल्व करें, तो इससे जहां छात्रों का समय बचेगा, वहीं उन्हें कागजांे में अपने नोट्स ध्यान से नहीं रखने होंगे। दरअसल जर्मन लैंग्वेज टीचर ऐसोसिएशन के अध्यक्ष शिमला के एक जर्मन निजी स्कूल में एक सेमिनार के लिए आए थे। स्कूल में सेमिनार आयोजित करने के बाद वह सोमवार को पत्रकारों से मुखातिब हुए। इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि अगर जर्मन लैंग्वेज की कक्षाएं लगाने में प्रदेश केे सभी छात्र समर्थ नहीं होते हैं, तो सरकारी स्कूलों में भी जर्मन भाषा से संबंधित विषय छात्रों को पढ़ाया जा सकता है। पत्रकार वार्ता के दौरान लक्ष्मी सेकर कालेपुर ने कहा कि वह भोपाल, चंडीगढ, जयपुर, महाराष्ट्र में जर्मनी भाषा में शिक्षण संस्थानों में लेक्चर दे चुके हैं। वहीं, इन दिनों शिमला में वह जर्मनी भाषा को छात्रों की स्किल को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ज्यादातर छात्रों की कॉम्युनिकेशन स्किल सही नहीं होती है। इस वजह से सरकारी स्कूलों के छात्रों को अगर दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए जाना होता है, तो उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि दिल्ली से आए जर्मन लैंग्वेज टीचर ऐसोसिएशन ऑफ इंडिया ने हिमाचल को भी जर्मन भाषा सिखाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर जर्मन भाषा और ऑनलाइन स्टडी स्कूलों में अपनाई जाती है, तो इससे आने वाले समय में ऑनलाइन के नेगेटिव परिणाम पॉजिटिव में परिवर्तित हो जाएंगे।

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