स्कॉलरशिप घोटाले में एफआईआर दर्ज

शिमला – हिमाचल के मेधावी छात्रों की स्कॉलरशिप घोटाले पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर दी है। बुधवार को शिमला स्थित सीबीआई थाने में इस पर मामला दर्ज किया गया। 250 करोड़ की छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई के शिमला थाना में बुधवार को आईपीसी की धारा 409, 419, 465, 466 और 471 के तहत पहली एफआईआर दर्ज कर दी है। ऐसे में अब सीबीआई इस घोटाले की जांच में तेजी लाएगी। स्कॉलरशिप फर्जीबाडे़ की जांच सीबीआई को सौंपने से पहले कार्मिक मंत्रालय भारत सरकार के पास फाइल फंसी हुई थी। प्रदेश सरकार से दो बार पूरा ब्यौरा मांगने के बाद कार्मिक मंत्रालय भारत सरकार ने सोमवार को यह मामला सीबीआई को सौंप दिया और बुधवार को शिमला स्थित सीबीआई थाने में मामला दर्ज किया गया। ऐसे में अब प्रदेश और प्रदेश के बाहर निजी शिक्षण संस्थानों में सीबीआई की टीम कभी भी दबिश दे सकती है। प्रदेश सहित अन्य राज्यों में संचालित निजी शिक्षण संस्थानों को खौफ सताने लगा है। इस मामले में कई बड़े शिक्षण संस्थान जांच के दायरे में हैं। शिमला पुलिस ने शिक्षा विभाग की शिकायत के आधार पर जो एफआईआर दर्ज की थी, उसमें भी कुछ निजी शिक्षण संस्थानों के नामों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद कुछ संस्थानों के प्रतिनिधि सचिवालय भी पहुंचे थे। स्कॉलरशिप घोटाला देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। बताया जा रहा है कि कई राष्ट्रीयकृत बैंक भी इसमें शामिल हैं। शिक्षा विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धनराशि का गबन किया है। 80 फीसदी छात्रवृत्ति का बजट सिर्फ  निजी संस्थानों में बांटा गया, जबकि सरकारी संस्थानों को छात्रवृत्ति के बजट का मात्र 20 फीसदी हिस्सा मिला। चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19 हजार 915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। इसी तरह 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है। ऐसे में अब सीबीआई कभी भी एफआईआर दर्ज कर सकती है।

ऐसे हुआ खुलासा

राज्य सरकार को शिकायत मिली थी कि जनजातीय क्षेत्र लाहुल-स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिल रही। ऐसे में शिकायतों को संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने मामले की जांच करवाने का निर्णय लिया। इस दौरान फर्जी एडमिशन से छात्रवृत्ति राशि के नाम पर घोटाले होने के तथ्य सामने आए। घोटाले की राशि 250 करोड़ बताई जा रही है।

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