स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम की पहरेदारी

विपक्षी दल ईवीएम की सुरक्षा को लेकर बीते कई दिनों से चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि ईवीएम की सुरक्षा की बात की जाए तो इसे संदेह के दायरे से परे कहा जा सकता है। किसी भी मतदान स्थल पर पोलिंग के बाद ईवीएम को बॉक्स में रखा जाता है और फिर पूरे सुरक्षा दस्ते के साथ उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है, जो पूरी तरह से सील होता है। स्ट्रॉन्ग रूम के दरवाजे सील किए जाते हैं, यहां तक कि रूम में यदि कोई विंडो होती है तो उसी भी सील कर दिया जाता है। स्ट्रॉन्ग रूम का मतलब उस कमरे से है, जो पूरी तरह सील हो और किसी भी गैर-आधिकारिक व्यक्ति का वहां प्रवेश न हो सके। मतदान के बाद ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम में रखी जाती है और इनकी सुरक्षा के लिए चुनाव आयोग पूरी तरह सतर्क रहता है। देश भर के स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम की सुरक्षा चुनाव आयोग तीन स्तरों पर करता है। इसकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती रहती है। केंद्रीय बल स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर की सुरक्षा देखते हैं, जबकि बाहर की सुरक्षा राज्य पुलिसबलों के हाथों में होती है। स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा की निगरानी जिला के डीएम और एसपी के हाथों में होती है। साफ है कि प्रदेश सरकार के अधिकारियों के हाथ में भी स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी की जिम्मेदारी होती है। स्ट्रॉन्ग रूम की सीलिंग के वक्त राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। इन प्रतिनिधियों को भी अपनी तरफ से सील लगाने का अधिकार होता है। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल में होते हैं। इसके अलावा सुरक्षा बलों के पास एक लॉग बुक होती है, जिसमें हर आने-जाने वाले की डिटेल होती है। यही नहीं इन सबसे अलग प्रत्याशियों के एजेंटों का भी जोरदार जमावड़ा हर स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर होता है।

 

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